Intercontinental Exchange (ICE) ने लंदन में गोल्ड, सिल्वर, प्लैटिनम और पैलेडियम के लिए फिजिकल फ्यूचर्स ट्रेडिंग शुरू कर दी है। कंपनी का लक्ष्य लंदन के **$190 बिलियन** के डेली बुलियन मार्केट को रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म पर लाना है, हालांकि निवेशकों को इसकी सफलता पर नजर रखनी होगी।
बाजार को बदलने की कोशिश
Intercontinental Exchange, जो New York Stock Exchange की पैरेंट कंपनी है, ने अब लंदन के बुलियन मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए फिजिकल फ्यूचर्स ट्रेडिंग की शुरुआत की है। इस कदम का उद्देश्य उस मार्केट को रेगुलेट करना है जो अभी तक 'ओवर-द-काउंटर' (OTC) यानी प्राइवेट डील्स के जरिए चलता आया है। लंदन का यह मार्केट हर दिन $190 बिलियन का कारोबार करता है, जिसे अब कंपनी अपने रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश कर रही है।
पुरानी चुनौतियां और लिक्विडिटी का संकट
लंदन में फ्यूचर्स मार्केट खड़ा करना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण काम रहा है। इससे पहले 2017 में London Metal Exchange ने भी ऐसी कोशिश की थी, लेकिन पर्याप्त पार्टिसिपेंट्स न मिलने के कारण उसे बंद करना पड़ा। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल 'लिक्विडिटी' का है। अगर ट्रेडर्स पुराने प्राइवेट तरीके को ही चुनते रहे, तो इस नए प्लेटफॉर्म के लिए वॉल्यूम जुटाना मुश्किल हो सकता है।
ब्रोकरेज और फाइनेंशियल हेल्थ पर नजर
कंपनी के इस बड़े दांव के बीच, फाइनेंशियल फर्म TD Cowen ने कंपनी के शेयर को 'Buy' से डाउनग्रेड करके 'Hold' कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितता और बिजनेस मिक्स में बदलाव के कारण सावधानी बरतना जरूरी है। हालांकि, कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है, जिसने हालिया तिमाही में 61% का एडजस्टेड ऑपरेटिंग मार्जिन दर्ज किया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह नया प्लेटफॉर्म पुराने प्रयासों की तरह विफल होगा या इस बार बाजार में अपनी जगह बना पाएगा।
