भारत का थर्मल कोल इम्पोर्ट (Thermal Coal Imports) जुलाई में घटकर **10.88 मिलियन टन** रहने का अनुमान है। यह पिछले 11 महीनों का सबसे निचला स्तर होगा। बढ़ती ग्लोबल कीमतों के कारण, घरेलू बिजली की भारी मांग के बावजूद, कंपनियां खरीदारी से कतरा रही हैं। वहीं, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई देश गर्मी में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इम्पोर्ट बढ़ा रहे हैं।
Detailed Coverage
कीमतों का खेल और भारत का फैसला
एशियाई देशों में जहां थर्मल कोल इम्पोर्ट (Thermal Coal Imports) बढ़ रहा है, वहीं भारत इस ट्रेंड के उलट जा रहा है। जुलाई में पूरे एशिया का सी-बोर्न थर्मल कोल इम्पोर्ट 73.16 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो लगातार तीसरी बार मासिक बढ़ोतरी है। लेकिन भारत का इम्पोर्ट घटकर लगभग 10.88 मिलियन टन रहने की उम्मीद है। यह भारत के लिए पिछले ग्यारह महीनों का सबसे कम आंकड़ा है, जबकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा थर्मल कोल इम्पोर्टर है।
क्या है वजह?
इस बड़े अंतर का मुख्य कारण है बढ़ती ग्लोबल कीमतें। जब से ग्लोबल थर्मल कोल की कीमतें बढ़ी हैं, भारतीय यूटिलिटीज (Utilities) सोच-समझकर खरीदारी कर रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई थर्मल कोल के लिए न्यूकैसल पोर्ट इंडेक्स (Newcastle Port index), जो एक अहम बेंचमार्क है, 24 जुलाई तक $132.76 प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया था, जो चार हफ्तों का उच्चतम स्तर था। कई भारतीय पावर प्लांट्स, जो अक्सर इंडोनेशियाई कोल पर निर्भर करते हैं, उन सबके लिए इस कीमत पर ज्यादा इम्पोर्ट करना मुश्किल हो रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में बिजली की मांग (Electricity Demand) गर्मियों में रिकॉर्ड तोड़ रही है, और कई पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक (Coal Inventories) घटकर करीब 14 दिनों के ऑपरेशन के लायक ही बचा है। इन सबके बावजूद, इम्पोर्ट कम करने का फैसला, बढ़ती ग्लोबल कीमतों पर खरीददारी के आर्थिक बोझ और बिजली उत्पादन क्षमता बनाए रखने के बीच एक नाजुक संतुलन को दर्शाता है।
एशिया में उलट ट्रेंड
जहां भारत अपना कोल इम्पोर्ट घटा रहा है, वहीं चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई देश अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए ज्यादा इम्पोर्ट कर रहे हैं। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा कोल इम्पोर्टर है, जुलाई में 28.14 मिलियन टन इम्पोर्ट करने की उम्मीद है, जो इस साल का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, जापान 10.46 मिलियन टन और दक्षिण कोरिया 8.54 मिलियन टन इम्पोर्ट कर सकता है, जो लगभग एक साल का उच्चतम स्तर है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
निवेशकों को आगे चलकर ग्लोबल कोल की कीमतों पर नजर रखनी होगी, खासकर इंडोनेशियाई थर्मल कोल की कीमतों पर। अगर कीमतें कम होती हैं, तो भारत में इम्पोर्ट बढ़ सकता है। अगर कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय पावर जेनरेटर्स को अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है।
