जुलाई 2026 में भारत में घर की बनी थाली की लागत बढ़ गई है, जिससे आम आदमी के बजट पर दबाव बढ़ा है। वेज थाली की कीमत **4%** बढ़कर **₹29.1** हो गई है, वहीं नॉन-वेज थाली की लागत **9%** उछलकर **₹58.3** पर पहुंच गई है।
थाली हुई महंगी, जानिए वजह
क्रिसिल (Crisil) की ताजा 'रोटी राइस रेट' (Roti Rice Rate) रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में शाकाहारी थाली की कीमत पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 4% ज्यादा रही। जून के मुकाबले भी यह 2% महंगी हुई है।
मांसाहारी थाली की कीमत में और भी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई। यह 9% बढ़कर ₹58.3 पर पहुंच गई। हालांकि, महीने-दर-महीने (month-on-month) के हिसाब से मांसाहारी खाने की लागत में कोई खास बदलाव नहीं आया, लेकिन साल-दर-साल (year-on-year) आधार पर इसमें 14% की बढ़ोतरी हुई है, जिसका मुख्य कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में उछाल है।
महंगाई के पीछे मुख्य कारण
वेज थाली की कीमत में इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण प्याज की कीमतों में 20% की जबरदस्त वृद्धि है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। वहीं, पिछले महीने से भी प्याज 23% महंगा हुआ है। महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण प्याज की आपूर्ति (supply) में कमी आई है। साथ ही, स्टोर किए गए पुराने प्याज की कीमतें भी बढ़ी हैं।
इसके अलावा, एनर्जी और इनपुट लागतों का भी असर देखा गया है। खाने के तेल (Vegetable oil) की कीमतें 11% और एलपीजी सिलेंडर (LPG cylinder) के दाम 10% तक बढ़ गए हैं। जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (conflict) और आयात लागत (import costs) बढ़ने की वजह से ईंधन और कुकिंग ऑयल की कीमतें बढ़ी हुई हैं।
राहत देने वाले तत्व और भविष्य का जोखिम
हालांकि, थाली की कुल लागत में कुछ चीजों की कीमतों में गिरावट भी देखी गई है। पिछले साल की तुलना में आलू 12% और टमाटर 2% सस्ते हुए हैं, जिससे कुल थाली की लागत को थोड़ा सहारा मिला है।
लेकिन, आने वाले महीनों के लिए स्थिति थोड़ी चिंताजनक बनी हुई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि प्याज की आपूर्ति में कमी के कारण इसकी कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। इसके अलावा, कोल्ड स्टोरेज से महंगे आलू बाजार में आने पर इनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है। वहीं, खरीफ की फसल की देरी और त्योहारी मांग के कारण सितंबर से टमाटर की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।
