भारत में स्पेशलिटी कॉफी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ग्राहक अक्सर कैफे के अनुभव पर ज्यादा ध्यान देते हैं, न कि कॉफी बीन्स के असली 'खेती वाले' ठिकाने पर। ऊंचाई, मिट्टी और प्रोसेसिंग जैसी चीजों की जानकारी की कमी इस इंडस्ट्री के लिए प्रीमियम दाम पाने में बाधा बन सकती है। मार्केट को मजबूत बनाने के लिए खेत से कप तक की पूरी वैल्यू चेन पर ध्यान देना होगा।
पिछले एक दशक में भारत का स्पेशलिटी कॉफी मार्केट काफी बढ़ा है। बड़े शहरों में नए-नए कैफे खुल रहे हैं और लोग कॉफी बनाने के अलग-अलग तरीकों और रोस्ट प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह बदलाव स्पेशलिटी कॉफी को एक खास पसंद से निकालकर आम लोगों तक ले आया है।
कैफे और फार्म के बीच का अंतर
हालांकि कॉफी एक खेती से जुड़ी चीज है, लेकिन ग्राहक अक्सर यह भूल जाते हैं कि यह कैसे उगाई गई। कॉफी की क्वालिटी कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे कि वह कितनी ऊंचाई पर उगाई गई है, मिट्टी कैसी है, वहां का मौसम कैसा है और कटाई के बाद उसे कैसे प्रोसेस किया गया। ये सब चीजें कॉफी के स्वाद और खासियत को तय करती हैं। लेकिन आजकल भारतीय बाजार में लोग कॉफी की स्ट्रेंथ, कड़वाहट या कैफीन जैसे ऊपरी गुणों पर ज्यादा बात करते हैं, न कि इन खेती से जुड़ी बातों पर।
यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे वाइन या खास किस्म के आम खरीदते वक्त लोग उसकी भौगोलिक जगह और उगाने के तरीके को देखकर क्वालिटी समझते हैं। कॉफी के साथ भी ऐसा ही होने लगे तो यह इंडस्ट्री एक बेहतर मुकाम पर पहुंचेगी।
क्वालिटी और कीमत पर असर
जब ग्राहक यह समझते हैं कि अच्छी क्वालिटी की कॉफी बनाने में कितनी मेहनत और हुनर लगता है, तो वे ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार होते हैं। इससे किसानों को भी बेहतर क्वालिटी कंट्रोल, नई प्रोसेसिंग टेक्निक्स और टिकाऊ खेती के तरीकों में निवेश करने का बढ़ावा मिलता है। अगर यह समझ नहीं होगी, तो किसान क्वालिटी की बजाय सिर्फ ज्यादा मात्रा में प्रोडक्शन पर ध्यान देंगे।
आगे का रास्ता और जोखिम
इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए कॉफी सप्लाई चेन के बारे में बेहतर जानकारी देना जरूरी है। अगर मार्केट सिर्फ कैफे के अनुभव पर ही अटका रहा, तो यह लंबे समय में अपनी पूरी वैल्यू नहीं बना पाएगा। एक ऐसा मार्केट जो कॉफी बीन्स के ओरिजिन के आधार पर अच्छी और औसत क्वालिटी में फर्क नहीं कर पाएगा, वह किसानों के लिए जरूरी प्रीमियम प्राइसिंग को सपोर्ट नहीं कर पाएगा।
आने वाले समय में, भारतीय स्पेशलिटी कॉफी इंडस्ट्री की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह 'खेत से कप तक' की पूरी कहानी कितनी ईमानदारी से बता पाती है। इस सेक्टर में निवेशक और स्टेकहोल्डर इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनियां और ब्रांड्स कैसे अपनी सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाते हैं और ग्राहकों को एजुकेट करते हैं, क्योंकि यही चीजें किसी भी ब्रांड के प्रति वफादारी और कीमत तय करने की क्षमता को बढ़ाएंगी।
