सोने के आसमान छूते दामों ने भारत में चांदी की मांग को रफ्तार दी है। ज्वेलरी रिटेलर्स से लेकर इंडस्ट्रियल सेक्टर तक, चांदी अब एक नए निवेश और फैशन विकल्प के रूप में उभर रही है।
भारत के प्रीशियस मेटल्स मार्केट में अब चांदी चर्चा का विषय बन गई है। कभी इसे सिर्फ सोने के सस्ते विकल्प के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। 'India Bullion & Jewellers Association' के आंकड़ों के अनुसार, इस बार फेस्टिव सीजन में चांदी की मांग में पिछले साल के मुकाबले 18% तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
रिटेल मार्केट में बदलाव
Senco Gold & Diamonds और Kalyan Jewellers जैसे बड़े रिटेलर्स अब चांदी को एक अलग और फैशनेबल कैटेगरी के रूप में पेश कर रहे हैं। कंपनीज का जोर अब डिजाइन और क्राफ्ट्समैनशिप पर है, ताकि युवा पीढ़ी इसे एक डेली-वियर एक्सेसरी के तौर पर अपना सके।
इंडस्ट्रियल डिमांड की ताकत
चांदी की चमक केवल गहनों तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल के प्रोडक्शन में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है, जिससे इसकी मांग के नए रास्ते खुले हैं। भारत सालाना करीब $9.2 बिलियन की रिफाइंड चांदी का आयात करता है, जो इस बाजार की मजबूती को दर्शाता है।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि, बाजार में रिस्क भी कम नहीं है। पिछले 24 महीनों में चांदी की कीमतों में 160% का उछाल आया है, जिससे कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव (volatility) देखने को मिल रहा है। 'London Stock Exchange Group' के जानकारों का कहना है कि चांदी की कीमतें ग्लोबल इन्फ्लेशन और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के प्रति काफी संवेदनशील हैं। ऐसे में निवेशकों को आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह बढ़ती मांग कंपनियों के रेवेन्यू और मार्जिन में बदल पा रही है या नहीं।
