Indian Seafood Sector: US टैरिफ का बड़ा झटका, EU FTA से मिली संजीवनी; Avanti Feeds और Apex Frozen Foods पर क्या होगा असर?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Seafood Sector: US टैरिफ का बड़ा झटका, EU FTA से मिली संजीवनी; Avanti Feeds और Apex Frozen Foods पर क्या होगा असर?
Overview

भारत का समुद्री भोजन (Seafood) सेक्टर इस वक्त दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ अमेरिका ने झींगा (Shrimp) पर **50%** का भारी टैरिफ लगा दिया है, तो दूसरी तरफ भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से यूरोपीय बाजार में बड़ी राह खुलने की उम्मीद जगी है। सरकार ने बजट 2026 में इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन US टैरिफ ने निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।

बजट का सहारा और सेक्टर का दम

भारत के समुद्री भोजन (Seafood) उद्योग के लिए अच्छी खबर है। यूनियन बजट 2026 में इस क्षेत्र को मज़बूती देने के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। इसमें खास इनपुट्स के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की सीमा को बढ़ाकर पिछले साल के एक्सपोर्ट टर्नओवर का 3% कर दिया गया है। साथ ही, फिशरीज़ वैल्यू चेन को बेहतर बनाने के लिए 500 अम्रत सरोवरों और बड़े जलाशयों को विकसित करने की योजना है। आपको बता दें कि भारत, दुनिया के कुल मछली उत्पादन का लगभग 8% हिस्सा रखता है, और इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

रिकॉर्ड एक्सपोर्ट पर अमेरिकी टैरिफ का 'शॉक'

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत के समुद्री भोजन निर्यात ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। कुल निर्यात ₹62,408 करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें फ्रोजन झींगा (Frozen Shrimp) की हिस्सेदारी ₹43,000 करोड़ से ज़्यादा रही। अमेरिका और चीन से ज़बरदस्त मांग के चलते यह मुकाम हासिल हुआ। मगर, इस शानदार परफॉर्मेंस के बीच सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका से आई है, जो भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन है। अमेरिका ने भारतीय झींगा पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया है, जिससे निर्यातकों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं। इस टैरिफ की वजह से भारतीय झींगा, इक्वाडोर और इंडोनेशिया जैसे देशों के मुकाबले महंगा हो रहा है, और ऑर्डर में ज़बरदस्त गिरावट देखी जा रही है।

EU-India FTA: एक रणनीतिक 'हेज़' और बड़ी उम्मीद

इस मुश्किल घड़ी में, जनवरी 2026 में साइन हुआ भारत-यूरोपीय संघ (EU) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है। यह एग्रीमेंट यूरोपीय बाजारों तक भारतीय सीफूड की पहुंच को आसान बनाएगा और इंडस्ट्री को वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद करेगा। मौजूदा समय में भारतीय सीफूड पर EU का 26% टैरिफ है, जिसे FTA के ज़रिए खत्म या काफी कम किया जाएगा। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को वियतनाम और इक्वाडोर जैसे प्रतिस्पर्धियों के बराबर खड़ा होने का मौका मिलेगा, जो पहले से ही तरजीही पहुंच का लाभ उठा रहे हैं। उम्मीद है कि यह FTA झींगा, मछली और अन्य वैल्यू-एडेड सीफूड उत्पादों के एक्सपोर्ट को नई गति देगा।

कंपनियों का प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति

Avanti Feeds, भारत की सबसे बड़ी झींगा फीड बनाने वाली कंपनी (मार्केट शेयर ~50%), लगातार मज़बूत वित्तीय स्थिति दिखा रही है। कंपनी का इंटरेस्ट कवरेज रेशियो अच्छा है और कैश कन्वर्जन साइकिल भी बेहतर है। इसका P/E रेशियो 16.67 से 18.95 के बीच है, जो बाज़ार में इसकी अच्छी वैल्यू को दर्शाता है। हालिया वित्तीय नतीजों में कंपनी ने प्रॉफ़िट ग्रोथ और ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) में शानदार प्रदर्शन किया है। साथ ही, Avanti Feeds अपनी सब्सिडियरी के ज़रिए पेट केयर (Pet Care) जैसे नए बाज़ारों में भी कदम रख रही है।

दूसरी ओर, Apex Frozen Foods, जो फ्रोजन झींगा के उत्पादन और निर्यात में लगी है, ने पिछले 3 सालों में लगातार पुअर प्रॉफ़िट ग्रोथ का सामना किया है। हालांकि, EU-India FTA कंपनी के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। FY25 में इसकी EU सेल्स 41% बढ़ी है और अब यह कंपनी के रेवेन्यू का 39% हिस्सा है। कंपनी ने Q2 FY26 में ज़बरदस्त नतीजे पेश किए हैं, जिसमें ग्रॉस प्रॉफ़िट सालाना आधार पर 76% बढ़ा है। Apex Frozen Foods का P/E रेशियो 40.18 से 44.6 के बीच है, जो अर्निंग्स के कम होने के कारण अपने साथियों से ज़्यादा है। इसके बावजूद, कंपनी पर कर्ज़ कम है और EU FTA से मिलने वाली तरजीही पहुंच इसके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। यह कंपनी Avanti Feeds और Coastal Corporation जैसे दिग्गजों को टक्कर देती है।

बाज़ार का रुझान और आगे की राह

वैश्विक सीफूड बाज़ार में तेज़ी की उम्मीद है। भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बना हुआ है, और इस सेक्टर का भविष्य उज्ज्वल दिखता है। बजट के बाद Avanti Feeds और Apex Frozen Foods जैसे एक्वाकल्चर कंपनियों के शेयरों में निवेशकों का उत्साह साफ दिख रहा है। EU-India FTA को भारतीय सीफूड एक्सपोर्टर्स के लिए मार्जिन बढ़ाने और कॉम्पिटिटिवनेस को मज़बूत करने में एक अहम कड़ी माना जा रहा है। यह अमेरिकी बाज़ार की अनिश्चितताओं से बचाव (hedge) करेगा और विकास के नए रास्ते खोलेगा।

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