RBI का बड़ा दांव: सोने में क्यों बढ़ रहा भरोसा?
भारत का केंद्रीय बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), अपनी एसेट मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी में एक बड़ा बदलाव कर रहा है। मार्च 2026 तक, विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाकर 16.7% कर दी गई है, जबकि छह महीने पहले यह 13.92% थी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में मामूली गिरावट देखी गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के कुल 880.52 मीट्रिक टन सोने का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा, यानी 680.05 मीट्रिक टन, अब देश के भीतर ही यानी डोमेस्टिक वॉल्ट्स (Domestic Vaults) में रखा जा रहा है। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि सिर्फ दो साल पहले, भारत के कुल सोने का आधा हिस्सा ही देश में संग्रहित था। इस कदम को करेंसी की अस्थिरता (Currency Volatility) और भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के तौर पर देखा जा रहा है। यह वैश्विक स्तर पर सेंट्रल बैंकों के बीच अपनाई जा रही एक आम रणनीति बन गई है।
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट, पर सोने की चमक?
इस दौरान, देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर $691.11 बिलियन रह गया, जो पिछले छह महीनों में $700.09 बिलियन था। RBI की रिपोर्ट में बढ़ते वित्तीय जोखिमों (Financial Risks) का भी जिक्र है। दिसंबर 2025 तक, विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले अस्थिर कैपिटल फ्लो (Volatile Capital Flows) का अनुपात बढ़कर 69.1% हो गया, जो छह महीने पहले 66.1% था। वहीं, अल्पकालिक ऋण (Short-term Debt) का भंडार से अनुपात बढ़कर 21.9% हो गया, जो पहले 19.7% था।
ग्लोबल सेंट्रल बैंक की गोल्ड स्ट्रैटेजी
यह बदलाव ग्लोबल ट्रेंड के अनुरूप है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक महंगाई (Inflation), करेंसी की वैल्यू में गिरावट और भू-राजनीतिक तनावों से बचाव के लिए सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं। पिछले दस सालों से सेंट्रल बैंक सोने की बिकवाली से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, और हाल के वर्षों में यह खरीदारी और तेज हुई है। चीन और रूस जैसे देश भी अपने गोल्ड होल्डिंग्स बढ़ा रहे हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर पर उनकी निर्भरता कम हुई है।
सोने में निवेश के जोखिम
हालांकि, इस रणनीति में कुछ जोखिम भी हैं। वैश्विक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर गोल्ड रिजर्व के मूल्य पर पड़ सकता है। अगर सोने की कीमतों में भारी गिरावट आती है, तो विदेशी मुद्रा भंडार का रिपोर्टेड मूल्य काफी कम हो सकता है। डोमेस्टिक वॉल्ट्स में सोने को स्टोर करने से नियंत्रण भले ही बढ़ता है, लेकिन इससे फिजिकल सिक्योरिटी और ट्रांसपोर्टेशन जैसे जोखिम भी बढ़ जाते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में आई कमी चिंता का विषय हो सकती है। ये रिजर्व आयात (Imports) को कवर करने और विदेशी कर्जों (External Debts) को चुकाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। दिसंबर 2025 तक, ये रिजर्व 10.8 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त थे।
आगे क्या?
दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों का सोने में रुझान जारी रहने की उम्मीद है, जो कि बढ़ते भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और स्थिर संपत्ति की तलाश से प्रेरित है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोना एक महत्वपूर्ण रिजर्व एसेट बना रहेगा, जो महंगाई और प्रमुख मुद्राओं के कमजोर होने के खिलाफ बचाव प्रदान करेगा। भारत का अपने डोमेस्टिक गोल्ड रिजर्व को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना एक दीर्घकालिक योजना को दर्शाता है।
