रूस इन दिनों ईंधन की भारी किल्लत से जूझ रहा है, और इस मुश्किल घड़ी में भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। Nayara Energy ने करीब **68,000 मीट्रिक टन** गैसोलीन (पेट्रोल) रूस को भेजा है। यह भारतीय तेल रिफाइनर, जिसमें रूस की Rosneft की भी हिस्सेदारी है, का एक दुर्लभ कदम है। हालांकि, कुछ रिपोर्टों की मानें तो ऊंचे इंपोर्ट कॉस्ट के चलते यह पेट्रोल रूस में बिक नहीं पा रहा है।
रूस में पहली बार भारत से पहुंचा पेट्रोल
रूस इस वक्त अपनी घरेलू रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए, भारत से 68,000 मीट्रिक टन गैसोलीन (पेट्रोल) का एक शिपमेंट पहली बार रूसी बंदरगाह विटिनो पहुंचा है। यह माल भारत के वडिनार पोर्ट से लोड किया गया था।
Nayara Energy और Rosneft का कनेक्शन
यह पेट्रोल Nayara Energy ने भेजा है, जो भारत की एक बड़ी रिफाइनर है। खास बात यह है कि रूस की सरकारी ऑयल कंपनी Rosneft की इसमें 49.13% हिस्सेदारी है। इस शिपमेंट को मिस्र के तट के पास शिप-टू-शिप ट्रांसफर से गुजारकर आर्कटिक तक पहुंचाया गया, जो कि इस पूरे ऑपरेशन की जटिलता को दर्शाता है। रूस की रिफाइनिंग क्षमता पर ड्रोन हमलों के कारण काफी असर पड़ा है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
कीमतों का पेंच फंसा
हालांकि, भारत से आए इस पेट्रोल को रूसी बाजार में बेचना आसान नहीं हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि इंपोर्ट कॉस्ट ज्यादा होने के कारण इस पेट्रोल का एक हिस्सा अभी भी रूसी पोर्ट्स पर अनसोल्ड (बिना बिका) पड़ा है। यानी, भारत से माल लाने का खर्चा इतना ज्यादा है कि रूसी होलसेल मार्केट में इसकी कीमत फिट नहीं बैठ रही है।
आगे क्या?
रूस पहले भी पड़ोसी देशों जैसे बेलारूस और कजाकिस्तान से ईंधन लेता रहा है और घरेलू जरूरत को प्राथमिकता देने के लिए निर्यात पर सख्ती भी लगाई है। भारत से यह पेट्रोल इसी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले हफ्तों में भारत से कम से कम दो और पेट्रोल कार्गो आने की उम्मीद है। हालांकि, यह देखना होगा कि क्या रूस अपनी प्रोडक्शन क्षमता को स्थिर कर पाता है और क्या इंपोर्टेड फ्यूल की लागत को घरेलू बाजार के हिसाब से एडजस्ट किया जा पाता है। यह पूरा मामला दिखाता है कि सप्लाई की दिक्कतें कैसे ग्लोबल एनर्जी लॉजिस्टिक्स को बदल रही हैं।
