भारत का नेचुरल डायमंड सेक्टर इस फाइनेंशियल ईयर में **$14.8 बिलियन** से **$15.2 बिलियन** के रेवेन्यू का लक्ष्य लेकर चल रहा है। एक्सपोर्ट में **5-7%** की गिरावट के बावजूद घरेलू मांग में **12-15%** की तेजी इंडस्ट्री के लिए बड़ा सहारा बनी हुई है।
भारत का नेचुरल डायमंड उद्योग फिलहाल स्थिरता के दौर से गुजर रहा है। हालांकि, पारंपरिक एक्सपोर्ट मार्केट की कमजोरी ने चुनौतियों को बढ़ा दिया है, जिसके कारण कंपनियां अब वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए घरेलू बाजार पर ज्यादा निर्भर हैं।
एक्सपोर्ट की चुनौतियां और LGD का असर
अमेरिका और चीन जैसे बड़े बाजारों में मांग कमजोर होने के कारण एक्सपोर्ट में 5-7% की गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे कुल एक्सपोर्ट करीब $11.5 बिलियन रहने का अनुमान है। इस सुस्ती के बीच 'लैब-ग्रोन डायमंड्स' (LGD) का दबदबा बढ़ रहा है। भले ही LGD का कुल एक्सपोर्ट वैल्यू में हिस्सा केवल 10.5% है, लेकिन ये एंट्री-लेवल सेगमेंट में नेचुरल डायमंड्स की कीमत तय करने की क्षमता पर दबाव डाल रहे हैं।
मार्जिन और इन्वेंट्री का दबाव
कंपनियों के मुनाफे पर भी काफी असर पड़ रहा है। ऑपरेटिंग मार्जिन 3.6% से 4.0% के बीच रहने का अनुमान है। वर्किंग कैपिटल की समस्या को देखते हुए इन्वेंट्री टर्नओवर साइकिल 170 दिनों तक पहुंच गया है। इस स्टॉक प्रेशर को देखते हुए इंडस्ट्री के खिलाड़ी रफ-डायमंड की खरीद पर काफी सख्त कंट्रोल रख रहे हैं ताकि कीमतों में भारी गिरावट न आए।
घरेलू बाजार बना सहारा
अच्छी बात यह है कि देश के भीतर डायमंड ज्वेलरी की खपत तेजी से बढ़ रही है। कुल रेवेन्यू का करीब एक-चौथाई हिस्सा घरेलू बाजार से आ रहा है, जिसमें इस साल 12-15% की ग्रोथ की उम्मीद है। संगठित रिटेल चेन्स (Organized retail chains) और प्रीमियम ज्वेलरी की बढ़ती मांग से कंपनियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, फिलहाल यह घरेलू ग्रोथ अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट में आ रही कमी की पूरी तरह भरपाई करने के लिए काफी नहीं है।
फिलहाल, ज्यादातर रेटेड कंपनियों का डेट सर्विसिंग बेहतर स्थिति में है और इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 2.3 से 2.4 गुना के बीच स्थिर है।
