ग्लोबल अनिश्चितता और बढ़ती महंगाई के बीच सोने की कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। साथ ही, भारत सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को दोगुना कर 15% तक पहुंचा दिया है। ऐसे में, भारतीय सोने के खरीदार अब एक नई रणनीति अपना रहे हैं।
18 मई 2026 तक, 24K सोने का भाव करीब ₹15,622 प्रति ग्राम पर पहुंच गया है। 13 मई 2026 को सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया। कमजोर होते रुपये को सहारा देने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मई को सोने की खरीद कम करने की अपील भी की थी, जिसका असर अब दिखना शुरू हो गया है।
इस माहौल में, पुराने गहनों को एक्सचेंज कर नए गहने खरीदने का चलन तेज़ी से बढ़ा है। 2026 की पहली तिमाही में सोने के गहनों की मांग वॉल्यूम में 19% गिरी, लेकिन कीमतों के कारण इसका वैल्यू 47% बढ़कर ₹99,920 करोड़ हो गया। इस गैप ने सोने में 'इन्वेस्टमेंट डिमांड' को हवा दी है। पहली बार 2026 की पहली तिमाही में, इन्वेस्टमेंट डिमांड ने ज्वेलरी खरीदने को पीछे छोड़ दिया। यह कुल मांग का 54.3% रहा, जो 82 मीट्रिक टन था।
Retailers के लिए पुराने सोने का एक्सचेंज अब बिक्री का एक बड़ा हिस्सा बन गया है, जो 40% से 60% तक पहुंच रहा है। Kalyan Jewellers, Malabar Gold & Diamonds, और Muthoot Exim जैसे बड़े ज्वेलर्स इस स्कीम को बढ़ावा दे रहे हैं। देश के घरों और मंदिरों में करीब 32,000 टन बिना इस्तेमाल हुआ सोना पड़ा है, जिसका रीसाइक्लिंग बड़ा अवसर है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि इसमें से सिर्फ 1% सोना रीसायकल होने पर सालाना 300 टन गोल्ड इम्पोर्ट कम हो सकता है।
सिर्फ पुराने गहने बदलना ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की पसंद भी बदल रही है। खास तौर पर युवा पीढ़ी अब हल्के कैरेट जैसे 9KT और 14KT सोने के गहने पसंद कर रही है। Millennials और Gen Z इसे फैशन के तौर पर रोज़ाना पहनना चाहते हैं, न कि सिर्फ एक लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में। यह शिफ्ट लैब-ग्रोन डायमंड्स (LGDs) के बाजार को भी तेज़ी दे रहा है। 2026 से 2036 तक इसके 14.8% की CAGR से बढ़कर USD 1.79 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह affordability, sustainability और ethical sourcing जैसे कारणों से युवा उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं से मेल खा रहा है।
हालांकि, 15% की इंपोर्ट ड्यूटी से अवैध व्यापार और तस्करी बढ़ने का खतरा भी है, जैसा कि 2013 में हुआ था। प्रधानमंत्री की अपील का असर फिलहाल मनोवैज्ञानिक ज्यादा है। लेकिन ऊंची कीमतें और आयात लागत कुल मांग को कम कर सकती है या उसे अनौपचारिक बाजारों की ओर धकेल सकती है। भारत अपनी 85% सोने की जरूरत के लिए आयात पर निर्भर है, जो एक आर्थिक चुनौती बनी हुई है।
भारतीय ज्वेलरी मार्केट के 2033 तक USD 153.77 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें 2026-2033 के दौरान 6.5% की CAGR से बढ़ोतरी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों की मांग मजबूत बनी रहेगी, जिससे गोल्ड बार, कॉइन और ETF की मांग बढ़ेगी। सोने को सक्रिय रूप से मैनेज करने की यह नई प्रवृत्ति (रीसाइक्लिंग, एक्सचेंज प्रोग्राम, LGDs में रुचि) भारतीय घरों में सोने की भूमिका को बदल रही है।