भारत के कीमती धातु (precious metal) आयात के आंकड़े सोने (Gold) और चांदी (Silver) के बीच एक बड़ा अंतर दर्शाते हैं, जिसका देश के व्यापार संतुलन (trade balance) पर अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। जहां सोने के आयात की मात्रा (volume) में गिरावट आई, वहीं चांदी के आयात में भारी उछाल देखा गया, जो कि बढ़ती वैश्विक कीमतों (global prices) और बढ़ती औद्योगिक मांग (industrial demand) का मिलाजुला असर था।
सोने के वॉल्यूम में गिरावट, कीमत में उछाल
अप्रैल से दिसंबर 2025 की अवधि में, भारत की सोने की आयात मात्रा में 18.29% की भारी गिरावट आई, जो घटकर 522.38 हजार किलोग्राम रह गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब सोने की औसत यूनिट कीमत में 24.62% की भारी वृद्धि हुई, जो पिछले साल की समान अवधि के $75,873.08 प्रति किलोग्राम से बढ़कर $94,554.33 प्रति किलोग्राम हो गई। नतीजतन, सोने के कुल आयात मूल्य (import value) में मामूली 1.83% की वृद्धि हुई, जो $48.51 अरब से बढ़कर $49.39 अरब हो गया। यह ट्रेंड बताता है कि सोने की ऊंची कीमतें भौतिक मांग (physical demand) को कम कर रही हैं, जिससे उपभोक्ता अधिक सतर्क हो रहे हैं या वैकल्पिक संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले छह वर्षों में, आयात मूल्य में 76% की वृद्धि देखी गई है, जबकि मात्रा में 23% की कमी आई है।
चांदी की औद्योगिक मांग से आयात में भारी उछाल
इसके बिल्कुल विपरीत, चांदी (Silver) के आयात में भारी वृद्धि देखी गई। अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि में चांदी के कुल आयात मूल्य में 128.95% का जबरदस्त उछाल आया, जो पिछले साल की समान अवधि में $3.39 अरब से बढ़कर $7.77 अरब हो गया। इस उछाल की मुख्य वजहें थीं: आयात मात्रा में 56.07% की वृद्धि, जो 5,727.07 हजार किलोग्राम तक पहुंच गई, और औसत यूनिट कीमत में 46.69% का इजाफा, जो $1,356.98 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी की मजबूत मांग का सीधा संबंध इसके बढ़ते औद्योगिक उपयोग से है, जो सौर ऊर्जा (solar energy), इलेक्ट्रॉनिक्स (electronics), इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और मेडिकल उपकरणों (medical equipment) जैसे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। यह औद्योगिक उपयोग चांदी को सोने से अलग करता है, जिसे मुख्य रूप से निवेश (investment) और मूल्य के भंडार (store of value) के रूप में देखा जाता है।
कीमती धातुओं के आयात से बढ़ा व्यापार घाटा
कीमती धातुओं के आयात में इस भिन्नता ने भारत के समग्र व्यापार घाटे (trade deficit) को बढ़ाने में योगदान दिया। अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि के लिए, कुल व्यापार घाटा बढ़कर $96.58 अरब हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में $88.43 अरब था। यह वृद्धि न केवल चांदी के आयात में उछाल के कारण हुई, बल्कि सोने के आयात के बढ़े हुए मूल्य के कारण भी हुई। जनवरी 2026 में भी कुल आयात में 18.77% की साल-दर-साल वृद्धि देखी गई, जिससे उस महीने व्यापार घाटा $10.38 अरब हो गया। अकेले जनवरी 2026 में सोने का आयात $12.07 अरब तक पहुंच गया, जिसने इस व्यापार असंतुलन में बड़ी भूमिका निभाई।
व्यापक आर्थिक जोखिम और भविष्य का अनुमान
सोने और चांदी के आयात मूल्य में लगातार उच्च स्तर, जो कीमतों में वृद्धि से प्रेरित है, कई व्यापक आर्थिक जोखिम (macroeconomic risks) प्रस्तुत करता है। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (foreign exchange reserves) पर दबाव डालता है और चालू खाता घाटे (current account deficit) को बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, चांदी की औद्योगिक मांग भविष्य में भी मजबूत बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि यह नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स (advanced electronics) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक है। इसके विपरीत, सोने का भविष्य प्रदर्शन भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं (geopolitical tensions) के बीच एक सुरक्षित-संपत्ति (safe-haven asset) के रूप में इसकी अपील पर निर्भर करेगा। हालांकि, लगातार ऊंची कीमतें भारत में सोने की खुदरा मांग को सीमित कर सकती हैं, जिससे मूल्य-संचालित आयात का चलन जारी रहेगा।
