सरकारी एक्शन और बाजार पर असर
भारत सरकार ने देश से विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह (outflow) को रोकने और बढ़ते व्यापार घाटे (trade deficit) को काबू करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने 12 मई 2026 से सोने और चांदी के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है।
इंपोर्ट पर लगाम और पीएम की अपील
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को नागरिकों से गैर-जरूरी खर्चों, जैसे सोने की खरीदारी, को कम करने की अपील की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत का सोने का इंपोर्ट वितीय वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड $71.98 बिलियन तक पहुंच गया था, जो कि पिछले साल की तुलना में 24% ज्यादा था। इस भारी इंपोर्ट ने देश के व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डाला था।
ज्वेलरी कंपनियों पर डबल अटैक
बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी घरेलू निर्माताओं के लिए लागत बढ़ाएगी, जिससे सोने के आभूषण महंगे हो जाएंगे। इससे शादियों और त्योहारों के सीजन में मांग में कमी आने की आशंका है। इस खबर से शेयर बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तुरंत बिकवाली देखने को मिली। उदाहरण के लिए, Kalyan Jewellers India ने हाल ही में Q4 FY26 में 118% का जोरदार नेट प्रॉफिट दर्ज किया था और रेवेन्यू में 66% की बढ़ोतरी दिखाई थी। वहीं, मार्केट लीडर Titan Company का P/E रेशियो 75-115 के आसपास है, जबकि Senco Gold और PC Jeweller जैसे स्टॉक्स का P/E रेशियो 10-13 के दायरे में है। इन बढ़ी हुई लागतों का इन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।
भविष्य की चुनौतियाँ और बाजार का नज़रिया
भारत का ज्वेलरी मार्केट 2029 तक $130-$140 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन यह कदम सेक्टर के लिए एक चुनौती पेश करता है। उपभोक्ता अब सोने को आभूषण के बजाय एक निवेश के तौर पर ज्यादा देख रहे हैं। इसके अलावा, ड्यूटी बढ़ने से सोने की तस्करी (smuggling) बढ़ने की भी चिंताएं हैं। पीएम की खर्च कम करने की अपील भी गैर-जरूरी चीजों की खरीद पर मनोवैज्ञानिक असर डाल सकती है।
आगे क्या?
निवेशक अब बारीकी से नजर रखेंगे कि ज्वेलरी कंपनियाँ अपनी कीमतों को कैसे समायोजित करती हैं, अपने इन्वेंट्री को कैसे मैनेज करती हैं, और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं को कैसे पूरा करती हैं। आने वाले समय में कंपनियों के लिए लागत प्रबंधन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
