भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़त का असर
सोमवार को सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी दिखी। MCX गोल्ड फ्यूचर्स ₹139 चढ़कर ₹1,58,686 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह स्थिरता पश्चिम एशिया में बढ़ी भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच आई, जब एक ड्रोन हमले ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में परमाणु ऊर्जा सुविधा में आग लगा दी। इस घटना ने मध्य-पूर्व में सप्लाई बाधित होने के डर को फिर से जगाया, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $111 प्रति बैरल के ऊपर और दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। परंपरागत रूप से, ऐसे हालात सोने जैसी सुरक्षित संपत्ति (safe-haven asset) को सहारा देते हैं, लेकिन मौजूदा बाजार में कई जटिल कारक हावी हैं।
हार्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी अनिश्चितता, जो कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्ग है, इन चिंताओं को बढ़ा रही है और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में मासिक 16% से अधिक की वृद्धि में योगदान दे रही है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आमतौर पर महंगाई की चिंताओं को बढ़ाती हैं जो सोने के लिए अच्छी मानी जाती हैं, लेकिन यह प्रभाव अब अन्य मजबूत बाजार शक्तियों से मुकाबला कर रहा है।
ब्याज दरों का बढ़त और डॉलर का दबदबा
बाजार की भावना लगातार ऊंची ब्याज दरों पर केंद्रित है। हालिया आर्थिक आंकड़ों, जैसे कि उम्मीद से बेहतर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग के आंकड़े, से यह उम्मीद बढ़ रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है या इस साल के अंत में एक और बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। यह संभावना, साथ ही मजबूत होते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) जिसने सोमवार को 99.3311 का छह-सप्ताह का उच्च स्तर छुआ, सोने पर दबाव डाल रही है। मजबूत डॉलर और बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yields), जो वर्तमान में 4.63% पर है, सोने को कम आकर्षक बना रही हैं, खासकर उन संपत्तियों की तुलना में जो ब्याज अर्जित करती हैं। इन कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें एक महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं।
भारत में गोल्ड प्रीमियम: ड्यूटी बढ़ने से आया अंतर
वैश्विक गिरावट और ऊंची अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के बावजूद, MCX गोल्ड की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। इसका मुख्य कारण भारत सरकार का 13 मई, 2026 को सोने पर आयात शुल्क (import duty) को दोगुना कर 15% करना है, जो पहले 6% था। रुपये को सहारा देने और डॉलर के बहिर्वाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किए गए इस महत्वपूर्ण टैरिफ hike ने भारत में सोने के आयात की लागत को काफी बढ़ा दिया है। नतीजतन, घरेलू सोने की कीमतें वैश्विक कीमतों की तुलना में एक बड़े प्रीमियम पर कारोबार कर रही हैं, जो MCX गोल्ड को अंतरराष्ट्रीय गिरावट से बचा रही है। घरेलू सप्लाई की तंग स्थिति भी इस प्रीमियम को और सहारा दे रही है। इस कदम का मतलब मौजूदा कीमतों पर आयात लागत में लगभग $704 प्रति औंस (ounce) की बढ़ोतरी है। विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि इससे अल्पावधि में मांग कम हो सकती है, लेकिन अतीत में ड्यूटी बढ़ाने के बाद मांग पूरी तरह खत्म होने के बजाय या तो खरीद में देरी हुई है या फिर अनौपचारिक माध्यमों की ओर रुख हुआ है।
विश्लेषकों का नज़रिया: अस्थिरता के बीच सतर्क आशावाद
आगे चलकर, विश्लेषकों को 2026 में सोने के लिए मिले-जुले परिणाम की उम्मीद है। हालांकि, अधिकांश विश्लेषक सतर्क आशावाद बनाए हुए हैं। J.P. Morgan और Goldman Sachs जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाएं 2026 के अंत तक सोने की कीमतों का औसत $4,900 से $5,400 प्रति औंस रहने का अनुमान लगा रही हैं। Master Capital Services Limited के चीफ रिसर्च ऑफिसर, डॉ. रवि सिंह का कहना है कि MCX गोल्ड फ्यूचर्स में तकनीकी पुलबैक (technical pullback) देखा जा रहा है, लेकिन समग्र रुझान सकारात्मक बना हुआ है, जिसमें हायर हाई (higher highs) और हायर लो (higher lows) बन रहे हैं। उन्होंने MCX गोल्ड के लिए तत्काल सपोर्ट ₹1,57,100 और रेजिस्टेंस ₹1,61,000 का देखा है। अन्य अनुमानों के अनुसार, यदि मैक्रो स्थितियां (macro conditions) ऐसी ही बनी रहीं, तो केंद्रीय बैंकों और निवेशकों से संरचनात्मक मांग (structural demand) के कारण सोना $5,000/औंस तक पहुंच सकता है। विश्व बैंक (World Bank) ने 2026 के लिए कीमती धातुओं की कीमतों में 42% की महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है।
जोखिम और चुनौतियां: ब्याज दरों का असर
हालांकि, जोखिम भी बने हुए हैं। लगातार ऊंची ब्याज दरें सोने की अपील के लिए एक चुनौती पेश करती हैं, क्योंकि यील्ड (yield) देने वाली संपत्तियां अधिक आकर्षक हो जाती हैं, जिससे निवेशक सोने से पैसा निकालकर इनमें निवेश कर सकते हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर भी नीचे की ओर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, चांदी का प्रदर्शन, जो ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो (gold-to-silver ratio) पर कारोबार कर रही है, जटिलता बढ़ाती है। चांदी की दोहरी औद्योगिक और मौद्रिक मांग वाले कारक, अपनी उच्च अस्थिरता के साथ, यह संकेत दे सकते हैं कि यह प्रतिशत के मामले में सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, जिससे संभावित रूप से पीले धातु से निवेश हट सकता है। ऊर्जा बाजारों पर लगातार भू-राजनीतिक जोखिमों का प्रभाव, जो आमतौर पर सोने के लिए तेजी का कारक होता है, वर्तमान में दर वृद्धि की उम्मीदों से कहीं दब गया है, जो सुरक्षित संपत्ति (safe-haven assets) के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल को दर्शाता है। कुछ विश्लेषकों का सुझाव है कि हालांकि सोना अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज (200-day moving average) से ऊपर बना हुआ है, लेकिन $4,500 के निशान से नीचे गिरना मंदी के रुझान (bearish trend) के जारी रहने का संकेत दे सकता है।