क्यों बढ़ाई गई ड्यूटी?
सरकार ने इस कदम के ज़रिए देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को बचाने की कोशिश की है। मध्य पूर्व में चल रहा संकट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के चलते यह चिंता बढ़ गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कम खर्च और गैर-ज़रूरी आयात को घटाने की अपील के अनुरूप यह नीतिगत बदलाव किया गया है।
ज्वैलर्स को क्या उम्मीद?
आयात शुल्क बढ़ने से ज्वेलरी की बिक्री में फिलहाल 10-15% की अस्थायी गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि, ज्वैलर्स का मानना है कि भारत में सोने की डिमांड (Demand) मजबूत बनी रहेगी। शादियों और त्यौहारों के मौसम में सोने की सांस्कृतिक अहमियत और एक सुरक्षित निवेश (Investment) के तौर पर इसकी पहचान के कारण खरीदार इससे मुंह नहीं मोड़ेंगे। कुछ एक्सपर्ट्स पतले और हल्के गहनों की ओर झुकाव की भी संभावना जता रहे हैं।
घरेलू रीसाइक्लिंग पर जोर
इस ड्यूटी बढ़ोतरी को भारत के घरेलू गोल्ड मार्केट (Gold Market) को मजबूत करने के मौके के तौर पर देखा जा रहा है। इम्पोर्ट कॉस्ट (Import Cost) बढ़ने से मौजूदा सोने के भंडार को रीसायकल (Recycle) करने को बढ़ावा मिलेगा, जिससे विदेशी सप्लाई पर निर्भरता घटेगी। कल्याण जूलर्स इंडिया लिमिटेड (Kalyan Jewellers India Ltd) जैसी कंपनियां 'गोल्ड4इंडिया' (Gold4India) जैसी पहलों से निष्क्रिय पड़े सोने को सर्कुलेशन में लाने की कोशिश कर रही हैं।
कीमतों में भारी उछाल
इस नई ड्यूटी के बाद दिल्ली में सोना करीब ₹8,550 बढ़कर ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुँच गया। वहीं, चांदी ₹20,500 की तेज़ी के साथ ₹2,97,500 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भले ही फिजिकल डिमांड (Physical Demand) पर थोड़े समय के लिए असर पड़े, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने का सुरक्षित-संपत्ति (Safe-haven Asset) के तौर पर महत्व बना रहेगा।
