Gem & Jewelry Sector: मुनाफे की नई राह पर भारत, क्या FY26 में चमकेगा एक्सपोर्ट?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Gem & Jewelry Sector: मुनाफे की नई राह पर भारत, क्या FY26 में चमकेगा एक्सपोर्ट?

भारत का रत्न और आभूषण निर्यात फाइनेंशियल ईयर 2026 में **$27.72 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है। अब इंडस्ट्री साधारण गोल्ड से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू और टेक-इनेबल्ड मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रही है।

भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब देश सिर्फ गोल्ड इम्पोर्टर नहीं, बल्कि एक स्पेशलाइज्ड ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर है। FY26 में कुल एक्सपोर्ट $27.72 बिलियन दर्ज किया गया है। ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद, कंपनियां अब अपने मार्जिन को प्रोटेक्ट करने के लिए हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स पर ध्यान लगा रही हैं।

वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर जोर

भारत दुनिया के लगभग 90% कट और पॉलिश्ड डायमंड्स को प्रोसेस करता है। आंकड़ों के मुताबिक, स्टडेड (जड़ाऊ) गोल्ड ज्वेलरी के एक्सपोर्ट में 6.27% की ग्रोथ देखी गई है। कंपनियां अब 3D प्रिंटिंग और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि इंटरनेशनल लक्जरी मार्केट की सख्त शर्तों को पूरा किया जा सके और लो-मार्जिन कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भरता कम हो।

रेगुलेटरी और मार्केट चुनौतियां

सरकार द्वारा मई 2026 में सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 15% करने से रॉ मटेरियल की लागत काफी बढ़ गई है। इसके चलते घरेलू रिटेल वॉल्यूम पर दबाव है। हालांकि, कंपनियां अब ऑस्ट्रेलिया जैसे नए बाजारों की ओर रुख कर रही हैं, जहां एक्सपोर्ट में 38.33% की दमदार ग्रोथ देखने को मिली है।

निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कंपनियां 15% की हाई इंपोर्ट ड्यूटी, वर्किंग कैपिटल का दबाव और लैब-ग्रोन डायमंड्स (LGDs) से बढ़ते कॉम्पिटिशन को कैसे हैंडल करती हैं। बैलेंस शीट की मजबूती ही इस दौर में कंपनियों की असली परीक्षा होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.