भारत के जेम और ज्वेलरी एक्सपोर्ट में **2.44%** की बढ़ोतरी हुई है, जो अप्रैल-जुलाई 2026-27 में **$9.17 बिलियन** तक पहुंच गया। सोने और चांदी के गहनों की मजबूत मांग ने डायमंड ट्रेड में आई गिरावट को संभाला है। यह दिखाता है कि इंडस्ट्री अब वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रही है।
सोने-चांदी के गहनों का जलवा
भारत का जेम और ज्वेलरी सेक्टर एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। चालू फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के पहले चार महीनों में एक्सपोर्ट $9.17 बिलियन पर पहुंच गया है। डॉलर में यह ग्रोथ 2.44% की रही, लेकिन अगर रुपये के टर्म्स में देखें तो यह 13.58% बढ़कर ₹87,078.01 करोड़ हो गई है। यह बढ़ोतरी घरेलू एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल अनिश्चितताओं से बचा रही है।
इंडस्ट्री अब पारंपरिक डायमंड कटिंग से हटकर वैल्यू-एडेड ज्वेलरी पर ज्यादा फोकस कर रही है। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के आंकड़ों के मुताबिक, स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी का एक्सपोर्ट 21.09% बढ़कर $2.24 बिलियन पर पहुंच गया है। वहीं, सिल्वर ज्वेलरी एक्सपोर्ट में 72.19% की जबरदस्त उछाल आई है, जो $508.18 मिलियन रहा। इससे पता चलता है कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स तैयार ज्वेलरी के ग्लोबल मार्केट में अपनी पैठ बना रहे हैं।
डायमंड सेक्टर की सुस्ती
दूसरी तरफ, डायमंड ट्रेड में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। अप्रैल-जुलाई के दौरान कट और पॉलिश किए गए डायमंड्स का एक्सपोर्ट पिछले साल के $3.91 बिलियन के मुकाबले 8% घटकर $3.60 बिलियन रहा। इस गिरावट ने कुल एक्सपोर्ट पर असर डाला है और यह पॉलिश डायमंड्स की ग्लोबल डिमांड में चल रही दिक्कतों को दर्शाता है। कलर्ड जेमस्टोन एक्सपोर्ट में भी 13.04% की गिरावट देखी गई। ऐसे में, इन्वेस्टर्स के लिए यह साफ है कि जो कंपनियां वैल्यू-एडेड गोल्ड ज्वेलरी पर फोकस कर रही हैं, वे ग्रोथ देख रही हैं, जबकि डायमंड प्रोसेसिंग पर निर्भर कंपनियां दबाव झेल रही हैं।
पॉलिसी और भविष्य का अनुमान
आगे चलकर, यह सेक्टर मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स और नए कानूनों से उम्मीदें लगाए हुए है। सोने की कीमतों में आई नरमी, जैसे जुलाई में 3.88% की गिरावट, यूएई, हांगकांग और सिंगापुर जैसे प्रमुख बाजारों में डिमांड को सहारा दे सकती है। इसके अलावा, 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल 2026' एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इस बिल में स्पेशल नोटिफाइड जोन (SNZs) के जरिए रफ डायमंड का ट्रेड करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए 15 साल की इनकम टैक्स छूट का प्रस्ताव है। अगर यह ठीक से लागू होता है, तो भारत डायमंड्स के लिए एक ग्लोबल ट्रेडिंग हब बन सकता है, जिससे पारंपरिक कटिंग और पॉलिशिंग मार्जिन पर निर्भरता कम हो सकती है।
इस सेक्टर पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स को यह देखना होगा कि ये पॉलिसी बदलाव लंबे समय में ट्रेड वॉल्यूम को कैसे प्रभावित करते हैं। फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्टडेड गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की मजबूत डिमांड, डायमंड एक्सपोर्ट की कमजोरी को कितनी हद तक भर पाती है। हालिया ट्रेड शो, जैसे IIJS भारत प्रीमियर 2026, से मिले ऑर्डर भी आने वाली तिमाही में एक्सपोर्ट डिमांड का संकेत देंगे।
