भारत की ऊर्जा पॉलिसी पर मूडीज की चेतावनी: अपारदर्शी सौदों से महंगाई बढ़ी, ग्रोथ हुई धीमी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत की ऊर्जा पॉलिसी पर मूडीज की चेतावनी: अपारदर्शी सौदों से महंगाई बढ़ी, ग्रोथ हुई धीमी
Overview

भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ईरान जैसे देशों के साथ सीधे, 'अपारदर्शी' (opaque) द्विपक्षीय सौदों की ओर बढ़ रहा है। रेटिंग एजेंसी मूडीज का मानना है कि इस बदलाव से एनर्जी की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, महंगाई बढ़ेगी और देश की आर्थिक ग्रोथ धीमी हो जाएगी।

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एनर्जी सप्लाई में बड़ा बदलाव, भारत पर दबाव

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम शिपिंग रूट्स पर बढ़ते खतरे के चलते समुद्री यातायात में 90% से ज़्यादा की भारी गिरावट आई है। पहले जहां रोजाना करीब 100 जहाज गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 6-7 रह गई है। इस वजह से दुनिया भर में तेल और एलपीजी (LPG) की सप्लाई के लिए पारंपरिक व्यापार की जगह 'बायलैटरल डील्स' (Bilateral Deals) का चलन बढ़ा है। लेकिन इन सौदों में पारदर्शिता की कमी है, जिससे भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों पर ऊंची इंपोर्ट कॉस्ट (import cost) और रुपये में गिरावट का दबाव बढ़ रहा है।

मूडीज की भारत को बड़ी चेतावनी

भारत अपनी ज़रूरत के करीब 88-90% कच्चे तेल और 60% एलपीजी का आयात करता है, और इसमें बड़ा हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, मूडीज (Moody's) ने भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान में 0.8% की कटौती की है। अब 2026 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.0% कर दिया गया है। मूडीज के मुताबिक, निजी खर्च में कमी, पूंजीगत निवेश में गिरावट और धीमी औद्योगिक ग्रोथ की वजह से यह स्थिति बनी है।

रुपया कमजोर, महंगाई का डर

इसके अलावा, भारतीय रुपया (Indian Rupee) भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 95.8900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। रुपये के इस हाल से इंपोर्टेड महंगाई (imported inflation) और बढ़ गई है। मूडीज का अनुमान है कि 2026 तक भारत में महंगाई दर औसतन 4.5% रह सकती है, जो पहले के अनुमान से 1% ज़्यादा है। वहीं, दूसरी तिमाही-तीसरी तिमाही 2026 तक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 5-6% तक पहुंच सकती है।

अपारदर्शी सौदों के अपने खतरे

देशों के बीच होने वाले ये 'अपारदर्शी' सौदे सप्लाई में अचानक रुकावट, कीमतों में हेरफेर और भ्रष्टाचार जैसे बड़े जोखिम पैदा करते हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (International Energy Agency) ने तो इसे ग्लोबल ऑयल मार्केट में अब तक का सबसे बड़ा सप्लाई डिस्टर्बेंस (supply disruption) करार दिया है। इराक, पाकिस्तान और चीन जैसे देश भी ईरान के साथ ऐसे सौदे कर रहे हैं। इन हालातों से निपटने के लिए भारत को एनर्जी सप्लाई के लिए एक नई और मज़बूत रणनीति बनानी होगी।

आगे का अनुमान

मूडीज का मानना है कि 2026 और 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.0% के आसपास ही रहेगी, जो 2025 में देखी गई 7.5% की ग्रोथ से काफी कम है। कच्चे तेल की कीमतें भी $90-$110 प्रति बैरल के बीच अस्थिर रहने की उम्मीद है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.