हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर बढ़ते हमलों के कारण तेल की सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे भारत का क्रूड ऑयल बास्केट उछलकर **$122.28** प्रति बैरल पहुंच गया है। इस संकट से भारत के इंपोर्ट बिल और महंगाई पर गहरा असर पड़ सकता है।
सप्लाई चेन पर संकट
हॉर्मुज और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य के पास कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों ने ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है। 5 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच के आंकड़ों पर नजर डालें तो हॉर्मुज रूट से आने वाले टैंकरों की संख्या गिरकर सिर्फ 4 रह गई है, जो पिछले हफ्ते 9 थी। अपनी सुरक्षा और कार्गो को बचाने के लिए शिपिंग कंपनियां इस जरूरी रूट से बचने की कोशिश कर रही हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए चिंता
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से मंगाता है, जो हमें ग्लोबल हलचल के प्रति बेहद संवेदनशील बनाता है। मध्य अक्टूबर तक क्रूड ऑयल का भाव $122.28 प्रति बैरल हो गया है, जबकि सितंबर में यह औसत $116.09 और अगस्त में $90.19 था। यह तेजी सीधे तौर पर देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर दबाव डाल रही है।
कंपनियों पर असर
- ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs): Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर ये कंपनियां चाहकर भी पूरी लागत ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, जिससे उनके मार्केटिंग मार्जिन घट जाते हैं।
- अपस्ट्रीम कंपनियां: ONGC और Oil India जैसी कंपनियां उच्च क्रूड प्राइसेज से फायदा जरूर कमाती हैं, लेकिन सरकार द्वारा लगाए गए विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) से उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीमित हो जाता है।
महंगाई और RBI का रुख
क्रूड की बढ़ती कीमतें देश में ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ा रही हैं, जो सीधे तौर पर महंगाई को हवा दे रही हैं। यह स्थिति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी मुश्किल खड़ी कर सकती है, क्योंकि महंगाई काबू में न आने पर ब्याज दरें (Interest Rates) लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। निवेशकों को अब इन कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर नजर रखनी चाहिए, जिससे पता चलेगा कि वे इस दबाव को कैसे मैनेज कर रही हैं।
