Crude Oil Import Bill: भारत के तेल बिल में भारी उछाल, **48%** बढ़कर **$74.8 बिलियन** पर पहुंचा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Crude Oil Import Bill: भारत के तेल बिल में भारी उछाल, **48%** बढ़कर **$74.8 बिलियन** पर पहुंचा

अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत का क्रूड ऑयल इम्पोर्ट बिल **48%** बढ़कर **$74.8 बिलियन** हो गया है। हालांकि तेल की कुल मात्रा लगभग स्थिर रही है, लेकिन ग्लोबल कीमतों में आई तेजी ने देश के ट्रेड बैलेंस और इन्फ्लेशन के लिए नए खतरे पैदा कर दिए हैं।

कीमतों का असर, मात्रा स्थिर

भारत के लिए चिंता की बात यह है कि तेल का बिल तो तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन खपत की मात्रा स्थिर बनी हुई है। अप्रैल से अगस्त के बीच 100.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 101.1 मिलियन टन था। इसका मतलब साफ है कि मांग बढ़ने के बजाय ग्लोबल बाजार में बढ़ी हुई कीमतों की मार भारत पर पड़ रही है।

केवल अगस्त महीने की बात करें, तो इम्पोर्ट वॉल्यूम में 3% की गिरावट के बावजूद बिल 18% बढ़कर $11.7 बिलियन पर पहुंच गया। 'पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल' के अनुसार, अगस्त में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत $90.19 प्रति बैरल थी, जो सितंबर में बढ़कर $113.90 प्रति बैरल तक पहुंच गई।

जियोपॉलिटिकल तनाव और चुनौतियां

ब्रेंट क्रूड का भाव लंबे समय से $100 प्रति बैरल के पार बना हुआ है। अमेरिका, ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और यमन में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल मार्केट में 'रिस्क प्रीमियम' जुड़ गया है। Crisil का अनुमान है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में ब्रेंट $88 से $93 प्रति बैरल के बीच रह सकता है, जबकि S&P ग्लोबल एनर्जी 2027 तक कीमतें $80 से $100 के दायरे में रहने की संभावना जता रही है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। एक सीधा गणित यह है कि अगर ग्लोबल मार्केट में तेल $1 प्रति बैरल महंगा होता है, तो भारत के सालाना आयात बिल पर $2 बिलियन का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। इसका सीधा असर रुपये की वैल्यू और महंगाई पर पड़ता है। अगस्त में थोक महंगाई दर पहले ही 9.9% पर है।

मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर इस महंगाई का सबसे गहरा असर देखने को मिल रहा है। हालांकि कुछ कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल रही हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना मुश्किल हो सकता है। निवेशकों को अब यह ट्रैक करना चाहिए कि क्या कंपनियां बिना डिमांड खोए अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचा पाने में सक्षम हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.