Reliance और Nayara ने घटाई रूसी तेल की खरीद, भारत का अप्रैल इम्पोर्ट 3.7% गिरा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Reliance और Nayara ने घटाई रूसी तेल की खरीद, भारत का अप्रैल इम्पोर्ट 3.7% गिरा
Overview

अप्रैल 2026 में भारत का कच्चा तेल आयात (Crude Oil Import) घटा है। इसकी मुख्य वजह Reliance Industries और Nayara Energy द्वारा रूस से तेल की खरीद कम करना है। इसके बावजूद, भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जिसकी कीमत करीब $5.82 अरब डॉलर है। यह सब तब हो रहा है जब ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $119 प्रति बैरल के पार चला गया है।

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रूसी तेल का कम हुआ आयात

अप्रैल 2026 में भारत का कुल कच्चा तेल आयात (Crude Oil Import) 3.7% घटकर 3.7% रहा। इसका सबसे बड़ा कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy) जैसे बड़े प्राइवेट रिफाइनरियों द्वारा रूस से तेल की खरीद में की गई कटौती है। ये कंपनियां रणनीतिक रूप से रूसी तेल का कम आयात कर रही हैं।

इस कमी के बावजूद, भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। अप्रैल में रूस से किए गए आयात की कुल कीमत लगभग $5.82 अरब डॉलर थी, जिसमें से 90% कच्चे तेल का हिस्सा था। नायरा एनर्जी की वडोदरा रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का आयात लगभग 92% तक कम हो गया, जिसका कारण मेंटेनेंस शटडाउन बताया जा रहा है। वहीं, सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil) की वडोदरा रिफाइनरी ने रूसी कच्चे तेल का आयात 87% बढ़ा दिया।

कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव

वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई रूट में रुकावटों के चलते अप्रैल 2026 के अंत तक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $119 प्रति बैरल के पार चला गया, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। रूस का Urals क्रूड भी औसतन $112.3 प्रति बैरल रहा, जो EU और UK के प्राइस कैप से काफी ऊपर है। मांग बढ़ने और टैंकरों की कमी के कारण Urals क्रूड और ब्रेंट क्रूड के बीच डिस्काउंट भी कम हो गया।

भारत का तेल आयात बिल बढ़ा

अप्रैल 2026 में भारत ने लगभग 20.1 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जिसकी कुल लागत $16.3 अरब डॉलर रही। पिछले साल की तुलना में आयात की मात्रा कम रही, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण लागत में भारी बढ़ोतरी हुई। अप्रैल 2026 में भारत के तेल बास्केट की औसत कीमत $114.48 प्रति बैरल पहुंच गई, जो अप्रैल 2025 के $67.72 से काफी ज्यादा है।

सेक्टर की वैल्यूएशन और जोखिम

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) का P/E रेशियो 5.18-5.7x है, जो इसे अंडरवैल्यूड (Undervalued) बताता है। वहीं, Reliance Industries का P/E 18.69-26.72 के बीच है, जो इंडस्ट्री के औसत से ऊपर है। नायरा एनर्जी का P/E 18.38 से 83.1 तक है, जबकि MRPL (Mangalore Refinery and Petrochemicals Ltd.) का P/E 13.50-14.99 के करीब है।

भविष्य की राह

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, जारी भू-राजनीतिक संकट के कारण 2026 में वैश्विक तेल की मांग 420 kb/d तक सिकुड़ने का अनुमान है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यवधान के कारण खाड़ी देशों का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रदर्शन के लिए कच्चे तेल के आयात की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.