Activated Carbon Industry: कच्चे माल की बढ़ती लागत से मार्जिन पर संकट, एक्सपोर्टर्स की बढ़ी चुनौती

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Activated Carbon Industry: कच्चे माल की बढ़ती लागत से मार्जिन पर संकट, एक्सपोर्टर्स की बढ़ी चुनौती

भारत का **₹4,700 करोड़** का एक्टिवेटेड कार्बन एक्सपोर्ट सेक्टर मुश्किल दौर से गुजर रहा है। नारियल के खोल (coconut shells) की बढ़ती कीमतों और चीनी कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच अब सप्लाई चेन को स्थिर करने के लिए इंडस्ट्री ने नया मंथली प्राइस बेंचमार्क पेश किया है।

भारत के एक्टिवेटेड कार्बन एक्सपोर्टर्स इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ जहां कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं, तो दूसरी तरफ ग्लोबल मार्केट में चीनी कंपनियों की आक्रामक प्राइसिंग। भारत का यह सेक्टर हर साल लगभग ₹4,700 करोड़ का एक्सपोर्ट करता है, लेकिन फिलहाल यह अपनी मार्केट हिस्सेदारी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

इंडस्ट्री की नई पहल

कीमतों में स्थिरता लाने के लिए 'Activated Carbon Manufacturers Association of India' (ACMAOI) ने अब नारियल के खोल के लिए मंथली इंडिकेटिव प्राइस तय करना शुरू कर दिया है। अक्टूबर 2026 के लिए यह लक्ष्य ₹98 से ₹100 प्रति किलो के बीच रखा गया है, जो सितंबर में ₹105 से ₹107 प्रति किलो के मुकाबले कम है। साथ ही, इंडस्ट्री अब सरकार से नारियल के खोल और चारकोल को GST दायरे में लाने की मांग कर रही है ताकि बाजार में पारदर्शिता आ सके।

ग्लोबल चुनौतियां और लॉजिस्टिक्स का बोझ

सिर्फ रॉ मटेरियल ही नहीं, लॉजिस्टिक्स भी एक्सपोर्टर्स के लिए सिरदर्द बना हुआ है। समुद्री माल ढुलाई (ocean freight) की बढ़ती दरें और जहाजों की कमी ने डिलीवरी लागत को काफी बढ़ा दिया है। इसके अलावा, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव ने सप्लाई चेन को बाधित किया है। वहीं, अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ और रूस व सूडान जैसे बाजारों तक पहुंच खोने से एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर गहरा असर पड़ा है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

कच्चे माल की महंगाई और लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों के कारण कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव साफ दिख रहा है। चूंकि मार्केट में चीन के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा है, इसलिए कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालने (pass-on) में असमर्थ हैं। आने वाली तिमाही नतीजों (Quarterly Results) पर नजर रखना जरूरी होगा, जिससे यह साफ हो पाएगा कि कौन सी कंपनियां इन चुनौतियों के बीच अपने मुनाफे को सुरक्षित रखने में कामयाब हो रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.