साल **2026-27** के लिए भारतीय अरेबिका कॉफी सीजन संकट में है। पश्चिमी घाट में बेमौसम बारिश और खतरनाक कीटों के हमले के कारण उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान
कॉफी बोर्ड के शुरुआती अनुमानों के उलट, अब जमीनी हकीकत यह है कि अरेबिका कॉफी का उत्पादन 10% से 20% तक गिर सकता है। पश्चिमी घाट के प्रमुख क्षेत्रों से मिल रही रिपोर्ट बताती है कि मानसून के दौरान अनियमित बारिश और कीटों ने फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है।
व्हाइट स्टेम बोरर का कहर
इस आपूर्ति संकट की मुख्य वजह 'व्हाइट स्टेम बोरर' नामक कीट है। मानसून के दौरान सूखे के लंबे दौर ने पौधों को कमजोर कर दिया, जिससे ये कीट अधिक सक्रिय हो गए। यह कीट सीधे कॉफी की झाड़ियों को नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे पैदावार घटने के साथ-साथ पौधों के मरने का खतरा भी बढ़ गया है। कर्नाटक के बागान मालिकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है।
किसानों की बढ़ती मुश्किलें
United Planters' Association of South India और Karnataka Planters Association ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण हैं। बढ़ती लागत और घटती पैदावार के कारण किसान अब अरेबिका को छोड़कर अधिक मजबूत 'रोबस्टा' (Robusta) कॉफी की तरफ रुख करने पर विचार कर रहे हैं।
बाजार पर असर
आने वाले हफ्तों में फसल कटाई की रफ्तार से तस्वीर और साफ होगी। नवंबर की शुरुआत में आने वाले आंकड़े यह तय करेंगे कि क्या 20% की गिरावट का अनुमान सही है और इसका ग्लोबल कॉफी कीमतों पर क्या असर पड़ेगा।
