Dalal Street में तेजी! कच्चे तेल के दाम गिरे, निवेशकों की बल्ले-बल्ले, पर भू-राजनीतिक तनाव का खतरा बरकरार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Dalal Street में तेजी! कच्चे तेल के दाम गिरे, निवेशकों की बल्ले-बल्ले, पर भू-राजनीतिक तनाव का खतरा बरकरार
Overview

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतों में आई गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजारों पर दिखा। तेल, एविएशन, पेंट और टायर जैसे सेक्टरों में जोरदार तेजी आई, जिससे Sensex और Nifty दोनों चढ़ गए। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से यह राहत अस्थायी साबित हो सकती है, जिससे कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव का खतरा बना हुआ है।

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कच्चे तेल के गिरे दाम से भारतीय बाज़ारों को सहारा

बुधवार को शेयर बाज़ारों में उन सेक्टर्स को ज़बरदस्त मजबूती मिली जो कच्चे तेल की कीमतों पर बहुत निर्भर करते हैं। उम्मीद की जा रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो सकती है, इसी से कच्चे तेल (Brent crude) का भाव $95 प्रति बैरल के नीचे आ गया। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों से एनर्जी सप्लाई में रुकावट का डर कम हुआ, जिसने बाज़ार को बड़ी राहत दी। इस पॉजिटिव सेंटीमेंट का असर पूरे बाज़ार पर दिखा, Sensex 1,200 अंकों से ज़्यादा उछला और Nifty 24,200 के पार चला गया। बाज़ार की अस्थिरता (volatility) मापने वाला India VIX भी गिरा।

कम तेल लागत से सेक्टर्स को मिला फायदा

तेल मार्केटिंग, एविएशन, पेंट और टायर बनाने वाली कंपनियों को सबसे ज़्यादा फायदा हुआ। Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum और Indian Oil Corp. जैसी कंपनियों के शेयर बढ़े, क्योंकि कम कच्चे तेल की लागत से उनके मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। एविएशन सेक्टर, जिसमें InterGlobe Aviation (IndiGo) जैसी कंपनियां शामिल हैं, भी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लागत कम होने की उम्मीदों से चढ़ी। पेंट कंपनियों जैसे Asian Paints और Berger Paints को भी कच्चे तेल से बनने वाले डेरिवेटिव्स की इनपुट कॉस्ट कम होने का फायदा मिला। वहीं, टायर कंपनियों Apollo Tyres और CEAT को भी कच्चे माल की लागत घटने की उम्मीद है। वैसे, Brent crude का भाव पिछले महीने 5.12% गिरकर लगभग $95.08 पर था, लेकिन साल-दर-साल यह अभी भी 44.39% महंगा है।

भू-राजनीतिक जोखिमों से बाज़ार की चाल पर खतरा

हालांकि, बाज़ार की यह पॉजिटिव चाल अभी थोड़ी नाज़ुक है। मौजूदा उम्मीदें काफी हद तक अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति पर टिकी हैं, जो किसी भी वक्त बदल सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर कोई भी झटका लगता है, तो यह पॉजिटिव सेंटीमेंट तुरंत पलट सकता है और कच्चे तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे बाज़ार में बिकवाली (sell-off) का दौर शुरू हो सकता है। Hormuz की जलडमरूमध्य तेल परिवहन के लिए बेहद अहम है, और वहां किसी भी तरह की बाधा से सप्लाई में बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। भारत, जो अपने 85-88% कच्चे तेल का आयात करता है, के लिए लगातार ऊंची तेल कीमतों का मतलब है कि करंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit) बढ़ेगा, महंगाई (inflation) बढ़ेगी और रुपया (rupee) कमज़ोर होगा, जिससे आर्थिक स्थिरता और विकास की राह मुश्किल हो जाएगी। Nifty 50 का P/E रेश्यो लगभग 20.9 है, जो दिखाता है कि कंपनियां बढ़ी लागत से दबाव में आ सकती हैं। उदाहरण के लिए, InterGlobe Aviation (IndiGo) का P/E लगभग 54.91 है, जो इसके 10 साल के औसत से काफी ऊपर है। टायर सेक्टर में भी valuation अलग-अलग हैं, Apollo Tyres का 30.05, CEAT का 28.90, और JK Tyre का 16.61 है।

आउटलुक: बाज़ार की स्थिरता भू-राजनीति पर निर्भर

विश्लेषकों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें $90-95 के बीच स्थिर रहती हैं, तो तेल पर निर्भर सेक्टर्स को राहत मिलती रहेगी। हालांकि, यह ट्रेंड भू-राजनीतिक घटनाओं पर बहुत निर्भर है। India VIX में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो तनाव कम होने की उम्मीदों के साथ गिरा है। जबकि बाज़ार की अस्थिरता अक्सर शॉर्ट-टर्म करेक्शन लाती है, ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि बाज़ार आमतौर पर रिकवर हो जाते हैं। भारतीय इक्विटी के लिए मीडियम-टर्म फोरकास्ट बताते हैं कि अगर भू-राजनीतिक स्थिरता और मज़बूत घरेलू मांग बनी रहती है, तो 2026 के अंत तक Nifty 50 25,000–26,000 और Sensex 85,000 तक पहुंच सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.