Indian Steelmakers: यूरोप से निर्यात घटा, चीन से सस्ते माल का दबाव; निवेशकों के लिए खास

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Steelmakers: यूरोप से निर्यात घटा, चीन से सस्ते माल का दबाव; निवेशकों के लिए खास

भारतीय स्टील कंपनियों के लिए मुश्किल हालात! यूरोप और ब्रिटेन से एक्सपोर्ट में **40%** की भारी गिरावट आई है। अब ये कंपनियां डोमेस्टिक मार्केट पर फोकस कर रही हैं, लेकिन चीन से आ रहे सस्ते स्टील के कारण घरेलू कीमतें भी दबाव में हैं। जानिए निवेशकों के लिए क्या हैं अहम बातें।

Detailed Coverage

निर्यात में भारी गिरावट, डोमेस्टिक मार्केट पर फोकस

यूरोप और ब्रिटेन जैसे बड़े बाजारों से भारतीय स्टील के एक्सपोर्ट में इस फाइनेंशियल ईयर में 40% तक की गिरावट आने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह इन देशों द्वारा लगाए गए नए इम्पोर्ट रूल्स और कार्बन टैक्स हैं। इस वजह से भारतीय स्टील निर्माता अब अपना ध्यान घरेलू बाजार की ओर मोड़ रहे हैं।

चीन से सस्ते इम्पोर्ट का दबाव

घरेलू बाजार में फोकस बढ़ाने के साथ ही भारतीय स्टील कंपनियों को चीन से आने वाले सस्ते स्टील का सामना करना पड़ रहा है। मार्केट डेटा के अनुसार, चीनी स्टील भारतीय स्टील की तुलना में $52 से $63 प्रति टन तक सस्ता है। इस बड़े प्राइस गैप के कारण घरेलू निर्माताओं के लिए अपने मुनाफे को बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

इस स्थिति को देखते हुए, भारतीय सरकार ने चीन, जापान और रूस से आने वाले हॉट-रोल्ड स्टील पर एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी है। जिंदल स्टेनलेस जैसी कंपनियों ने भी कहा है कि सस्ते इम्पोर्ट्स के कारण कॉम्पिटिशन बहुत बढ़ गया है और मुनाफा कमाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ और कैपेसिटी एक्सपेंशन

इन चुनौतियों के बावजूद, टाटा स्टील (Tata Steel) और जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) जैसी बड़ी कंपनियां भारत में अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। देश के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और आर्थिक ग्रोथ को देखते हुए लंबी अवधि में स्टील की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। भारत का लक्ष्य 2035-36 तक क्रूड स्टील प्रोडक्शन को 400 मिलियन टन तक पहुंचाना है। पिछले पांच सालों में, डोमेस्टिक स्टील की खपत हमेशा प्रोडक्शन से ज्यादा रही है, जो प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत को दिखाता है।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody's) का मानना है कि जब तक सरकार इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव नहीं करती या अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ प्राइस गैप कम नहीं होता, तब तक स्टील सेक्टर के मुनाफे में सुधार की उम्मीद कम है। निवेशकों के लिए आने वाले समय में इन बातों पर नजर रखना जरूरी होगा:

  • सरकार की एंटी-डंपिंग जांच का नतीजा
  • इम्पोर्ट टैरिफ स्ट्रक्चर में संभावित बदलाव
  • नई डोमेस्टिक कैपेसिटी की स्थापना की रफ्तार और उसका कंपनी की बैलेंस शीट पर असर
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.