भारतीय स्टील मार्केट में इस वक्त दो अलग-अलग ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। मॉनसून के कारण कंस्ट्रक्शन सेक्टर में लॉन्ग स्टील प्रोडक्ट्स की डिमांड कम हो गई है, जिससे इनकी कीमतों पर दबाव है। वहीं, फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
लॉन्ग स्टील पर दबाव
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, लॉन्ग स्टील प्रोडक्ट्स, जैसे कि कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले सरिया (rebar), की कीमतों में पिछले महीने के मुकाबले लगभग 9% की गिरावट आई है। इसकी मुख्य वजह मॉनसून के कारण देश भर में कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी का धीमा पड़ना है। इसके अलावा, इन प्रोडक्ट्स का स्टॉक (inventory) भी ज्यादा है और सेकेंडरी स्टील प्रोड्यूसर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते कीमतों पर और दबाव देखा जा रहा है।
फ्लैट स्टील में मजबूती
दूसरी ओर, हॉट-रोल्ड कॉइल्स (HRC) जैसे फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स में स्थिरता बनी हुई है। इसकी वजह इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और ग्लोबल कीमतों का स्थिर रहना है, जिससे इन प्रोडक्ट्स की घरेलू कीमतों को गिरने से रोका जा सका है। फ्लैट स्टील की मांग ऑटोमोबाइल और एप्लायंसेज जैसे इंडस्ट्रियल सेक्टर्स से आती है, जो कंस्ट्रक्शन पर निर्भर नहीं हैं।
कच्चे माल की लागत
कच्चे माल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। आयरन ओर की कीमत में पिछले महीने करीब 7% की गिरावट आई है, जबकि कोकिंग कोल की कीमत में 2% की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल की तुलना में कोकिंग कोल की कीमतों में 36% का इजाफा हुआ है। इन बढ़ती लागतों के बीच कंपनियों को अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए प्रोडक्शन एफिशिएंसी पर ध्यान देना होगा।
निवेशकों के लिए अहम बातें
आगे चलकर, मॉनसून के बाद कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी में तेजी आने से लॉन्ग स्टील की कीमतों में सुधार की उम्मीद है। वहीं, फ्लैट स्टील की कीमतों की स्थिरता इंपोर्ट कंट्रोल और बढ़ती कोकिंग कोल की लागत को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। स्टील कंपनियों के प्रदर्शन में उनके प्रोडक्ट मिक्स के आधार पर अंतर देखने को मिल सकता है।
