Indian Steel Sector: Q4 में बंपर नतीजों की उम्मीद! क्या कच्चे माल की लागत बिगाड़ेगी खेल?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Steel Sector: Q4 में बंपर नतीजों की उम्मीद! क्या कच्चे माल की लागत बिगाड़ेगी खेल?
Overview

PL Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय स्टील कंपनियों के लिए Q4 FY26 के नतीजे काफी मजबूत रहने का अनुमान है। डोमेस्टिक मांग और बढ़ी हुई कीमतों से कंपनियों को फायदा हो सकता है, लेकिन वैल्यूएशन और कच्चे माल की लागत जैसे मुद्दे चिंता का विषय बने हुए हैं।

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स्टील सेक्टर दिखाएगा दमदार परफॉरमेंस

PL Capital के अनुमानों के अनुसार, भारतीय मेटल और माइनिंग सेक्टर के लिए मार्च तिमाही (Q4 FY26) के नतीजे शानदार रहने वाले हैं। सेक्टर की रेवेन्यू में 15%, EBITDA में 23% और PAT में 64% की सालाना ग्रोथ का अनुमान है। यह तेजी मुख्य रूप से इसलिए दिख रही है क्योंकि मिड-दिसंबर से स्टील की कीमतों में उछाल आया है। इसकी वजह कोकिंग कोल की बढ़ी हुई लागत, चीन से कम एक्सपोर्ट और डोमेस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूत मांग है। जियोपॉलिटिकल टेंशन भी कीमतों को सहारा दे रही है। PL Capital को उम्मीद है कि टाटा स्टील (Tata Steel) और जिंदल स्टील पावर (Jindal Steel & Power) में डबल-डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ दिखेगी, जबकि जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) और सेल (SAIL) में मिड-सिंगल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिल सकती है। यह ग्रोथ डोमेस्टिक डिमांड और सरकारी खर्च के चलते जारी रहने की उम्मीद है।

बढ़ी कीमतें और मार्जिन, नतीजों को देंगे बूस्ट

अनुमानित अर्निंग्स ग्रोथ का एक बड़ा कारण नेट सेल्स प्रति टन में 8% की बढ़ोतरी है, जो हॉट-रोल्ड कॉइल की ऊंची कीमतों के चलते संभव हुआ है। हालांकि कोकिंग कोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा, लेकिन ओडिशा में आयरन ओर की स्थिर कीमतों ने कुछ राहत दी। इससे स्टील स्प्रेड्स में तिमाही-दर-तिमाही 24% का इजाफा हुआ और यह लगभग ₹22,000 प्रति टन तक पहुंच गया। इस स्प्रेड एक्सपेंशन से EBITDA प्रति टन में लगभग ₹2,200 की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जो सेक्टर की मजबूत अर्निंग्स ग्रोथ को गति देगा। बता दें कि भारतीय स्टील की कीमतें तीन साल की गिरावट के बाद 2026 की शुरुआत में सुधरी हैं, जिससे इस तिमाही के लिए एक पॉजिटिव बेस मिला है।

वैल्यूएशन पर खास नजर

प्रमुख भारतीय स्टील कंपनियों के वैल्यूएशन में काफी अंतर दिख रहा है। टाटा स्टील (Tata Steel) लगभग ₹206 पर ट्रेड कर रहा है, जिसका P/E रेश्यो 26.2 से 35.61 के बीच है। एनालिस्ट्स ने इसके लिए औसतन ₹212-₹232 का टारगेट प्राइस सेट किया है और 'Strong Buy' या 'Outperform' की रेटिंग दी है। जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) जो करीब ₹1,200-₹1,215 पर है, उसका P/E रेश्यो 32.53 से 50.7 के बीच है। इसके लिए एवरेज प्राइस टारगेट ₹1,215-₹1,255 के आसपास है और 'Moderate Buy' की कंसेंसस है। जिंदल स्टील पावर (JINDALSTEL) लगभग ₹1,219 पर 61.18 के P/E के साथ ट्रेड कर रहा है। इसके एवरेज टारगेट ₹1,168-₹1,205 हैं और 'Outperform' रेटिंग है। सेल (SAIL) लगभग ₹166 पर है, जिसका P/E रेश्यो 21.91 से 29.1 के बीच है। इसे सामान्य तौर पर 'Buy' रेटिंग मिली है, लेकिन हालिया स्पेसिफिक प्राइस टारगेट्स उपलब्ध नहीं हैं। कुल मिलाकर, FY26 में भारत का क्रूड स्टील आउटपुट 10.7% बढ़ा, वहीं कंजम्पशन 7-8% बढ़ा, जिसका मुख्य कारण डोमेस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग रहा। 2030 तक कैपेसिटी 220 मिलियन टन से बढ़कर 300 मिलियन टन होने की उम्मीद है।

जोखिम जिन पर रखनी होगी नजर

इन सकारात्मक अनुमानों के बावजूद, कुछ बातों पर गौर करना जरूरी है। जिंदल स्टील पावर का P/E रेश्यो 60 से ऊपर है, जो इंडस्ट्री के औसत से काफी ज्यादा है और यह प्रीमियम वैल्यूएशन को दर्शाता है। जेएसडब्ल्यू स्टील का P/E भी पिछले और सेक्टर के औसत की तुलना में ऊंचा लगता है, जिसका मतलब है कि भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें पहले से ही प्राइस में शामिल हैं। टाटा स्टील के पिछले प्रदर्शन को देखें तो, 5 सालों में सेल्स ग्रोथ सिर्फ 9.34% रही और पिछले तीन सालों में रिटर्न ऑन इक्विटी 6.23% रहा। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने सप्लाई में शुरुआती बाधाओं के चलते 2026 के लिए आयरन ओर का आउटलुक $95/टन और कोकिंग कोल का $190/टन बढ़ा दिया है। हालांकि, सप्लाई सामान्य होने पर इसमें नरमी की उम्मीद है। मिडिल ईस्ट जैसे जियोपॉलिटिकल टेंशन से एनर्जी और फ्रेट कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे भारतीय मिलों के लिए रॉ मटेरियल कॉस्ट और करेंसी एक्सचेंज रेट पर भी असर पड़ेगा।

आगे का रास्ता: ग्रोथ और जोखिमों का तालमेल

सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और मजबूत डोमेस्टिक डिमांड के सपोर्ट से भारतीय स्टील इंडस्ट्री में ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। 2030 तक कैपेसिटी में भी बड़ा इजाफा अपेक्षित है। हालांकि, सेक्टर को एनर्जी सिक्योरिटी, इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ज्यादातर एनालिस्ट्स प्रमुख स्टील फर्मों के लिए 'Buy' या 'Outperform' जैसी पॉजिटिव रेटिंग दे रहे हैं। लेकिन कुछ कंपनियों के हाई P/E रेश्यो, कच्चे माल की कीमतों में संभावित नरमी और जियोपॉलिटिकल जोखिमों को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि प्रदर्शन एक समान रैली की बजाय चुनिंदा कंपनियों में बेहतर रह सकता है।

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