देश में प्रीमियम चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जबकि सरकारी गोदाम FCI स्टॉक से भरे पड़े हैं। इसकी मुख्य वजह सरकारी सप्लाई और बाजार की डिमांड के बीच का अंतर है।
सरकारी स्टॉक बनाम बाजार की हकीकत\n\nभारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास अनाज का भारी भंडार है, लेकिन रिटेल मार्केट में प्रीमियम और सुगंधित चावल की कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस असंतुलन की मुख्य वजह सरकारी नीतियों का फोकस है। FCI का मुख्य काम पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के जरिए गरीब परिवारों तक सामान्य किस्म का अनाज पहुंचाना है, जबकि आम जनता और निर्यात बाजार में प्रीमियम क्वालिटी वाले चावल की मांग अधिक है। सरकार के पास मौजूद रिकॉर्ड स्टॉक में ऐसी प्रीमियम किस्में शामिल नहीं हैं, इसलिए सरकारी भंडार का बाजार भाव पर कोई सीधा असर नहीं पड़ रहा है।\n\n### मौसम की मार और सप्लाई चेन\n\nक्लाइमेट चेंज और अल-नीनो (El Niño) के असर ने खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। खास किस्म के चावलों की फसल बहुत संवेदनशील होती है, और अनियमित बारिश ने इनकी पैदावार को अनिश्चित बना दिया है। बाजार में डर का माहौल है—किसान और व्यापारी अपनी स्टॉक होल्डिंग बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।\n\n### एक्सपोर्ट और एफएमसीजी कंपनियों पर असर\n\nनॉन-बासमती चावल के निर्यात पर सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद, निर्यातक अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने में जूझ रहे हैं। जब हाई-ग्रेड चावल की पैदावार गिरती है, तो सप्लाई चेन में बड़ा व्यवधान आता है। कृषि और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए अगले सीजन की फसल और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की नई गाइडलाइंस पर नजर रखना बहुत जरूरी है। जब तक फसल के आंकड़े मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम नहीं करेंगे, तब तक प्रीमियम चावल की कीमतों में अस्थिरता बनी रहने की आशंका है।