Indian Rice Export: रुपये की कमजोरी के चलते चावल के भाव **1 साल** के उच्चतम स्तर पर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Rice Export: रुपये की कमजोरी के चलते चावल के भाव **1 साल** के उच्चतम स्तर पर

Indian Rice के एक्सपोर्ट भाव **$378** से **$384** प्रति टन के ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। रुपये में गिरावट से एक्सपोर्टर्स को तो सहारा मिल रहा है, लेकिन कमजोर मानसून और बढ़ते फ्रेट कॉस्ट ने चिंता बढ़ा दी है।

भारतीय चावल के एक्सपोर्ट भाव फिलहाल पिछले 1 साल से भी ज्यादा समय के अपने उच्चतम स्तर के करीब बने हुए हैं। 5% ब्रोकन परबॉइल्ड राइस की कीमत $378 से $384 प्रति टन के बीच ट्रेड कर रही है। इन ऊंची कीमतों का मुख्य कारण ग्लोबल मार्केट की मजबूती के साथ-साथ भारतीय रुपये का गिरना है। रुपये में आ रही गिरावट एक्सपोर्टर्स के लिए एक 'कुशन' का काम कर रही है, जिससे डोमेस्टिक पैडी (धान) की महंगी खरीद की भरपाई हो पा रही है।

प्रोडक्शन का रिस्क और सप्लाई चेन

कीमतों से इतर, एग्रीकल्चर सेक्टर में अनिश्चितता का माहौल है। पिछले एक दशक में पहली बार ऐसा हो सकता है कि भारत में चावल का प्रोडक्शन कम हो जाए। इसकी बड़ी वजह है अनियमित मानसून। कई प्रमुख उत्पादक इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जिससे हार्वेस्टिंग पर असर पड़ने की आशंका है। इन्वेस्टर्स के लिए यह सप्लाई-साइड का बड़ा रिस्क है, क्योंकि रॉ मटेरियल महंगा होने से बड़ी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

एक्सपोर्ट वॉल्यूम और लॉजिस्टिक्स की चुनौती

रुपये की कमजोरी का फायदा मिलने के बावजूद एक्सपोर्ट वॉल्यूम में नरमी देखी जा रही है। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल लॉजिस्टिक्स का महंगा होना है। फ्रेट रेट्स बढ़ने से इंटरनेशनल बायर्स के लिए कुल ट्रांजैक्शन कॉस्ट काफी बढ़ गई है, जिससे वे नए ऑर्डर देने में हिचकिचा रहे हैं।

ग्लोबल मार्केट की स्थिति

ग्लोबल कॉम्पिटिशन पर नजर डालें, तो थाईलैंड में 5% ब्रोकन राइस के भाव बढ़कर $465 से $468 प्रति टन तक पहुंच गए हैं। वहीं, वियतनाम का मार्केट सुस्त है, जहां भाव $420 से $430 के बीच स्थिर हैं। चीन और फिलीपींस जैसे बड़े मार्केट से मांग घटने के कारण वियतनाम के चावल एक्सपोर्ट में 9.3% की गिरावट आई है, जो पूरे एशियाई रीजन के लिए एक बड़ा संकेत है।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

आने वाले महीनों में डोमेस्टिक हार्वेस्ट का फाइनल डेटा सबसे अहम होगा, जिससे प्रोडक्शन की कमी का असली पता चलेगा। साथ ही, ग्लोबल शिपिंग रेट्स में कोई भी नरमी मांग को फिर से बढ़ा सकती है। इसके अलावा, सरकारी एक्सपोर्ट पॉलिसी में किसी भी बड़े बदलाव पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह रातों-रात पूरे मार्केट सेंटीमेंट को बदल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.