सरकार के नए फैसलों के बाद देश में चीनी की खुदरा कीमतों में **3.85%** की गिरावट आई है। अब दाम **₹62.57** प्रति किलो पर आ गए हैं, लेकिन जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि स्टॉक लिमिट का असर शुगर मिलों के प्रॉफिट मार्जिन पर कैसा पड़ेगा।
सरकारी दखल के बाद देश में चीनी के दाम कम होने लगे हैं। 3 सितंबर 2026 तक खुदरा कीमतें गिरकर ₹62.57 प्रति किलो पर पहुंच गई हैं। बढ़ती महंगाई को थामने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्चे चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, 15 सितंबर 2026 से डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट को 2,000 क्विंटल तक सीमित कर दिया गया है। वहीं, थोक ग्राहकों के लिए भी 15 दिन की इन्वेंट्री की पाबंदी लगा दी गई है।\n\n### थोक दाम गिरे, रिटेल में थोड़ा वक्त लगेगा\nसरकार के इन कदमों से थोक बाजार में चीनी का भाव ₹60.39 से गिरकर ₹57.62 प्रति किलो पर आ गया है। हालांकि, रिटेल में दाम उतनी तेजी से नहीं घट रहे हैं। इसकी मुख्य वजह सप्लाई चेन में होने वाली देरी है, क्योंकि रिटेलर पहले से महंगे खरीदे हुए स्टॉक को निकालने में समय लेते हैं। माना जा रहा है कि रिटेल भाव को थोक भाव के साथ एडजस्ट होने में करीब 10 दिन का समय लग सकता है।\n\n### शुगर मिलों की मुश्किलें बढ़ीं\nनिवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण है। 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले 343 लाख टन था, जिसे घटाकर अब 306 लाख टन कर दिया गया है। जब सरकार आयात और स्टॉक लिमिट जैसे हथियार अपनाती है, तो चीनी मिलों के लिए मुनाफा कमाना मुश्किल हो जाता है। वे बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर आसानी से नहीं डाल पाएंगी, जिससे उनके ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।\n\n### FMCG सेक्टर पर बना हुआ है दबाव\nभले ही कीमतों में मामूली कमी आई है, लेकिन अभी भी दाम पिछले महीने के ₹49.33 प्रति किलो के मुकाबले 27% ज्यादा हैं। यह उन FMCG और पैक्ड फूड कंपनियों के लिए चिंता का विषय है जो कच्चे माल के रूप में चीनी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती हैं। सालाना मांग 280 से 285 लाख टन के बीच बनी हुई है, ऐसे में निवेशकों की नजरें अब शुगर कंपनियों के अगले तिमाही नतीजों पर टिकी होंगी ताकि यह देखा जा सके कि सरकार की ये पाबंदियां उनके मुनाफे को कितना प्रभावित कर रही हैं।
