सितंबर 2026 में भारत में सोने की खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर **10%** की गिरावट दर्ज की गई है। सोने के भाव **₹1.57 लाख** प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने से उपभोक्ता अब हल्के गहनों या डिजिटल एसेट्स का रुख कर रहे हैं, जो फेस्टिव सीजन से पहले ज्वैलर्स और गोल्ड लोन कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है।
भारत के गोल्ड मार्केट में सुस्ती का माहौल है। पिछले एक साल में 24-कैरेट सोने की कीमतें 60% उछलकर ₹98,000 से ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई हैं। हालांकि हाल ही में कीमतों में 4.85% की मामूली गिरावट के साथ भाव ₹150,106 के स्तर पर आए हैं, लेकिन अभी भी कीमतें आम खरीदार की पहुंच से बाहर बनी हुई हैं।
ज्वैलरी रिटेलर्स पर असर
Titan Company और Kalyan Jewellers जैसी बड़ी कंपनियों के लिए यह दौर वॉल्यूम ग्रोथ के लिहाज से कठिन है। जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होती हैं, तो ग्राहक या तो खरीदारी टाल देते हैं या फिर बजट संभालने के लिए हल्के गहने चुनते हैं। कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि वे बढ़ती लागत को ग्राहकों पर कैसे डालें, बिना डिमांड को प्रभावित किए। यदि वॉल्यूम में यह गिरावट जारी रही, तो कंपनियों को अपनी ग्रोथ बनाए रखने के लिए डायमंड-स्टडेड गहनों के सेगमेंट पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
गोल्ड फाइनेंस का समीकरण
Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसी गोल्ड लोन कंपनियों के पास अब ज्यादा वैल्यू की कोलैटरल (Collateral) जमा है, जिससे वे ग्राहकों को बड़े लोन ऑफर कर सकती हैं। हालांकि, सोने के दामों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए इन्हें अपने लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेश्यो पर काफी सावधानी बरतनी होगी ताकि एसेट की वैल्यू गिरने पर सुरक्षा बनी रहे।
बदलते कंज्यूमर ट्रेंड्स
आंकड़े बताते हैं कि लोग सोना खरीदना छोड़ नहीं रहे, बल्कि निवेश का तरीका बदल रहे हैं। अब डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETFs और हल्के वजन के गहनों का चलन बढ़ रहा है। फेस्टिव और वेडिंग सीजन आने वाला है, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या फिजिकल गोल्ड की मांग फिर से पटरी पर लौटेगी या ग्राहकों का झुकाव डिजिटल विकल्पों की ओर ही बना रहेगा।
