त्योहारी सीजन में चीनी के बढ़ते दामों को थामने के लिए भारतीय शुगर रिफाइनर्स ने बाजार में **2.5 लाख टन** स्टॉक उतारा है। सरकारी दबाव के बाद हुई इस कार्रवाई से कीमतें गिरकर **₹43-44** प्रति किलो पर आ गई हैं, जिससे निवेशकों की नजरें अब मिलों के प्रॉफिट मार्जिन पर टिकी हैं।
त्योहारी मांग के बीच बढ़ती कीमतों को देखते हुए भारतीय शुगर रिफाइनर्स ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। Shree Renuka Sugars जैसी कंपनियों ने एडवांस लाइसेंसिंग स्कीम के तहत तैयार स्टॉक को एक्सपोर्ट के बजाय घरेलू बाजार में रिलीज करना शुरू कर दिया है। सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है ताकि देश में चीनी की कोई कमी न हो।
बाजार का हाल और कीमतें
कुछ समय पहले खुदरा और थोक बाजार में चीनी के दाम ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गए थे। हालांकि, सरकार की सख्ती और डीलर्स के लिए स्टॉक लिमिट 2,000 क्विंटल तय करने के बाद बाजार में नरमी आई है। मौजूदा समय में एक्स-मिल कीमतें घटकर ₹43-44 प्रति किलो के स्तर पर आ गई हैं, जो राहत की खबर है।
प्रोडक्शन का घटा अनुमान
चिंता की बात यह है कि 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के लिए प्रोडक्शन का अनुमान 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। फसल में 'रेड रॉट' और 'टॉप बोरर' जैसी बीमारियों के अलावा अनियमित बारिश ने गन्ने की पैदावार को प्रभावित किया है। हालांकि देश की खपत 280-285 लाख टन के आसपास बनी हुई है, लेकिन आपूर्ति में मामूली कमी भी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकती है। सरकार ने स्थिति को संभालते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की मंजूरी दी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। सरकारी हस्तक्षेप से चीनी मिलों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि कीमतों पर नियंत्रण सीधे तौर पर उनके मुनाफे को सीमित करता है। इसके अलावा, इथेनॉल ब्लेंडिंग और चीनी उत्पादन के बीच का तालमेल भी कंपनियों के लिए चुनौती बना हुआ है। अब निवेशकों को यह देखना होगा कि अक्टूबर में शुरू होने वाली क्रशिंग सीजन का असर आने वाले नतीजों में कैसा दिखाई देता है और क्या सरकार भविष्य में एक्सपोर्ट पॉलिसी में कोई बदलाव करती है या नहीं।
