Middle East टेंशन और कच्चे तेल का झटका! Dalal Street में भारी गिरावट, Sensex-Nifty धड़ाम

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Middle East टेंशन और कच्चे तेल का झटका! Dalal Street में भारी गिरावट, Sensex-Nifty धड़ाम
Overview

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल ने आज भारतीय शेयर बाजारों पर कहर बरपाया। गुरुवार को Sensex और Nifty दोनों ही धड़ाम हो गए। विदेशी निवेशकों (FII) की जोरदार बिकवाली और रुपए की कमजोरी ने आग में घी का काम किया।

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भू-राजनीतिक तनाव और तेल की आग ने मचाया हाहाकार!

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के कारण आज भारतीय शेयर बाजारों पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। भू-राजनीतिक चिंताओं के चलते BSE Sensex लगभग 1,583 अंक लुढ़ककर 71,550.92 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर आ गया, जबकि NSE Nifty 50 495 अंक की गिरावट के साथ 22,182.55 पर पहुंच गया।

यह गिरावट व्यापक थी, जिसमें लगभग सभी स्टॉक नीचे कारोबार कर रहे थे। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी 2.75% से ज्यादा की कमजोरी देखी गई। Nifty Pharma, Realty और PSU Bank जैसे सेक्टर्स 3% से अधिक गिरे। बाजार की बढ़ती घबराहट Nifty VIX में 3.89% की बढ़ोतरी के साथ 25.99 के स्तर पर पहुंच गई, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है। यह तेज गिरावट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए संभावित सैन्य कार्रवाई के बयानों के बाद आई, जिसने तनाव कम होने की उम्मीदों को पलट दिया।

भारत की तेल पर निर्भरता और इकोनॉमी पर खतरा

बाजारों की यह तेज प्रतिक्रिया भारत की ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता को उजागर करती है, क्योंकि देश अपनी 85-90% कच्चे तेल की जरूरतें आयात से पूरी करता है। कच्चे तेल का दाम (Brent crude futures) $106.5 प्रति बैरल के पार जाने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ेगा और भारतीय रुपए पर दबाव आएगा। रिसर्च बताती है कि क्रूड में $10 का इजाफा CAD को 0.5% GDP तक बढ़ा सकता है और GDP ग्रोथ को 0.25-0.27% तक घटा सकता है।

इसके अलावा, 1 अप्रैल को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹8,331 करोड़ की भारतीय इक्विटी बेचीं, जबकि मार्च महीने में यह बिकवाली लगभग ₹1.23 लाख करोड़ की रही। रुपए में भी पिछले महीने ₹94.8 प्रति डॉलर तक की कमजोरी आई। इस स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सट्टेबाजी को रोकने के लिए कदम उठाए हैं।

पिछले झटकों से अलग है मौजूदा हालात

ऐतिहासिक तौर पर, भारतीय बाजार अक्सर भू-राजनीतिक झटकों से उबरते रहे हैं। 1991 के खाड़ी युद्ध या रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भी ऐसी ही गिरावट देखी गई थी, लेकिन तब भारत की आर्थिक स्थिति कहीं अधिक नाजुक थी। मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की आयात पर निर्भरता और FIIs की बड़ी बिकवाली इसे और गंभीर बनाती है।

क्षेत्रीय बाजारों पर भी इसका असर पड़ा, जहां चीन का CSI 300 0.74%, हांगकांग का हैंग सेंग 1.1%, जापान का निक्केई 2.28% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.96% तक गिरे।

आगे क्या है बाजार का हाल?

कई विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में कई कारक एक साथ मिलकर बाजार के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। लगातार ऊंचे कच्चे तेल के दाम, रिकॉर्ड FII बिकवाली और कमजोर रुपया भारत के इकोनॉमिक आउटलुक पर सवाल खड़े कर रहा है। Goldman Sachs जैसे ब्रोकरेज हाउस पहले ही ग्रोथ अनुमानों को downgrade कर चुके हैं। Nifty 50 का 22,300 का सपोर्ट लेवल टूटना और भी बिकवाली का संकेत दे रहा है।

आगे चलकर, बाजार का सेंटिमेंट मध्य पूर्व की खबरों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा। एक्सपर्ट्स अभी 'सेल-ऑन-राइज' (ऊपर आने पर बेचो) की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। फिलहाल, जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उठापटक जारी रहने की आशंका है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.