Gold Silver India: ग्लोबल गिरावट के बावजूद भारत में सोने-चांदी की बंपर तेजी! जानें वजह

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AuthorMehul Desai|Published at:
Gold Silver India: ग्लोबल गिरावट के बावजूद भारत में सोने-चांदी की बंपर तेजी! जानें वजह
Overview

भारत में सोने और चांदी की कीमतें ग्लोबल मार्केट में गिरावट के बावजूद तेजी से बढ़ रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच लोकल डिमांड में उछाल देखा जा रहा है, जबकि मज़बूत अमेरिकी डॉलर अंतर्राष्ट्रीय कीमतों पर दबाव डाल रहा है।

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घरेलू बाज़ार में तूफानी तेज़ी, अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में गिरावट

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को भारतीय सर्राफा बाज़ार में सोने और चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला, जो कि वैश्विक बाज़ार की नरमी से बिल्कुल उलट है। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, 99.9% शुद्ध सोने का भाव ₹300 बढ़कर ₹1,57,300 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं, 24-कैरेट सोने की अन्य किस्में लगभग ₹1,53,790 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहीं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चांदी की कीमतों में ₹700 का इज़ाफ़ा हुआ और यह ₹2.58 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुँच गई। दूसरी ओर, MCX पर चांदी फ्यूचर्स करीब ₹2.51 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी।

यह भारतीय बाज़ार की मज़बूती ग्लोबल बाज़ार के बिल्कुल विपरीत है, जहाँ स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) लगभग 0.87% गिरकर $4,779.10 प्रति औंस पर आ गया, और स्पॉट सिल्वर (हाजिर चांदी) 1.29% की गिरावट के साथ $78.68 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

पश्चिम एशिया का तनाव और मज़बूत डॉलर: कीमतों का डबल इफ़ेक्ट

इस घरेलू उछाल का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच। ऐसे अनिश्चित माहौल में निवेशक सोने-चांदी जैसी सुरक्षित निवेश (safe-haven assets) की ओर रुख करते हैं। हालांकि, एक मज़बूत अमेरिकी डॉलर अंतर्राष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बना रहा है। 21 अप्रैल 2026 को US Dollar Index (DXY) 98.1870 के स्तर तक पहुँच गया। डॉलर के मज़बूत होने से डॉलर-नॉमिनेटेड संपत्तियां, जैसे सोना और चांदी, अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे ग्लोबल डिमांड पर अंकुश लगता है।

संकट के समय हमेशा नहीं बढ़ता सोना-चांदी

यह हालिया प्रदर्शन इस आम धारणा के विपरीत है कि वैश्विक संघर्ष हमेशा कीमती धातुओं की कीमतों को बढ़ाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय सोने की कीमतों में लगभग 6% की गिरावट दर्ज की गई थी। चांदी, जिसके औद्योगिक उपयोग भी हैं, जनवरी 2026 के अपने उच्चतम स्तर से मार्च 2026 तक लगभग 50% तक गिर गई थी, जो संभावित मैन्युफैक्चरिंग मंदी की चिंताओं को दर्शाता है।

भारतीय कीमतों के सामने चुनौतियाँ

फिलहाल, भारतीय सोने-चांदी की कीमतों में जो मज़बूती दिख रही है, उसके सामने कई बाधाएं हैं। मज़बूत अमेरिकी डॉलर की वजह से कीमती धातुएं विदेशी खरीदारों के लिए महंगी हो रही हैं, जो वैश्विक मांग को कम कर सकता है। साथ ही, महंगाई की चिंताओं के बीच सेंट्रल बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं, जिससे सोने जैसी गैर-मुनाफे वाली संपत्तियों (non-yielding assets) की अपील कम हो जाती है।

आगे का रास्ता: भू-राजनीति और डॉलर तय करेंगे चाल

बाज़ार की नज़रें अब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक विकास, महंगाई के रुझान और सेंट्रल बैंक की नीतियों पर टिकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और सेंट्रल बैंकों की diversification buying के चलते सोने का मीडियम-टर्म आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, नज़दीकी अवधि में कीमतें क्षेत्रीय तनाव, डॉलर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक संकेतकों से प्रभावित होंगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.