भारत में संगठित गोल्ड ज्वैलरी रिटेलर्स का रेवेन्यू इस फाइनेंशियल ईयर में **21-23%** तक बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, सोने की बढ़ती कीमतों के चलते बिक्री की मात्रा (Volume) में **4-6%** की गिरावट आने के आसार हैं।
ग्रोथ के पीछे का गणित
सोने की रिकॉर्ड कीमतों का असर कंपनी के रेवेन्यू पर तो दिख रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि ग्राहक अब कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। वैल्यू तो बढ़ रही है, लेकिन खरीदारी का वजन 4% से 6% तक कम हो सकता है। बढ़ती महंगाई के बीच ग्राहक अब कम कैरेट और हल्के वजन वाले गहनों (Lightweight designs) की ओर रुख कर रहे हैं, ताकि बजट पर बोझ न बढ़े।
मार्जिन पर भारी दबाव
रिटेलर्स के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले साल के 9.3% से गिरकर 8.5% से 8.7% तक रहने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अब इन्वेंट्री की कीमत बढ़ने से होने वाला फायदा (Inventory appreciation) कम हो गया है और ग्राहकों को लुभाने के लिए मार्केटिंग पर खर्च बढ़ाना पड़ रहा है।
स्टोर्स के विस्तार पर ब्रेक
कंपनियां अब अपनी रणनीति बदल रही हैं। पहले जो कंपनियां 12-15% की रफ्तार से नए स्टोर्स खोल रही थीं, अब उन्होंने इसे घटाकर 7-9% पर सीमित कर दिया है। रिटेलर्स फिलहाल कैश फ्लो बचाने और अपने क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत रखने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि सोने की ऊंची कीमतें और इंपोर्ट ड्यूटी वर्किंग कैपिटल की जरूरत को बढ़ाती हैं। चूंकि रिटेलर्स को भारी मात्रा में स्टॉक रखना पड़ता है, इसलिए कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर उनके मुनाफे को प्रभावित करता है। आने वाले समय में मार्जिन को सुरक्षित रखना कंपनियों के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा होगी।
