त्योहारी सीजन के बीच सोने की डिमांड में बदलाव आया है। कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के चलते अक्टूबर में रिटेल गोल्ड की बिक्री पिछले साल के मुकाबले **11%** नीचे रहने का अनुमान है।
बाजार में क्या बदल रहा है?
भारतीय ज्वेलरी मार्केट इस बार एक नए ट्रेंड का गवाह बन रहा है। कमोडिटी मार्केट में आई अस्थिरता के कारण सोने की कीमतों में पिछले पीक से 26% और चांदी में करीब 53% तक की गिरावट देखी गई है। इसका सीधा असर कंज्यूमर बिहेवियर पर पड़ा है, जहां खरीदार अब निवेश के बजाय जरूरत और स्टाइल पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
ग्लोबल संकट और कीमतों का कनेक्शन
मिडल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और बढ़ती एनर्जी कॉस्ट का असर घरेलू बाजार पर साफ दिख रहा है। महंगाई के बढ़ते दबाव के कारण सेंट्रल बैंक भी सतर्क हैं। ज्वेलरी कंपनियों के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि रॉ मटेरियल की कीमतों में बदलाव से उनके प्रॉफिट मार्जिन और वर्किंग कैपिटल पर दबाव बन सकता है।
हल्के डिजाइन और पुराने सोने का जादू
बदलती परिस्थितियों के बीच ग्राहकों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब भारी-भरकम गोल्ड बार खरीदने के बजाय, लोग 14-कैरेट और 18-कैरेट गोल्ड के हल्के डिजाइन और डायमंड ज्वेलरी को चुन रहे हैं। इतना ही नहीं, लोग बजट को मैनेज करने के लिए 'ओल्ड-गोल्ड एक्सचेंज स्कीम' का सहारा ले रहे हैं, ताकि महंगे होते सोने के दौर में भी उनकी खरीदारी जारी रहे।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दिवाली के बाद डिमांड कैसे रिकवर होती है और कंपनियां अपने इन्वेंट्री मैनेजमेंट को किस तरह दुरुस्त रखती हैं।
