2 सितंबर 2026 को सोने की कीमतों में लगातार पांचवें दिन गिरावट देखने को मिली है। भारत में अब सोना **₹1,50,000** से **₹1,52,000** प्रति 10 ग्राम के बीच ट्रेड कर रहा है। इसकी मुख्य वजह डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता है।
वैश्विक दबाव में bullion मार्केट
सोने की कीमतों में यह गिरावट केवल स्थानीय कारणों से नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक कारक हैं। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और US Treasury bond yields में बढ़ोतरी ने सोने की चमक को फीका कर दिया है। चूंकि सोने पर कोई डिविडेंड या ब्याज नहीं मिलता, इसलिए बढ़ती यील्ड निवेशकों को सरकारी बॉन्ड और कैश की ओर आकर्षित कर रही है।
क्यों बढ़ रही है अनिश्चितता?
मार्केट की चिंताएं केवल ब्याज दरों तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के चलते कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में उछाल आया है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने या और बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
त्योहारी सीजन के करीब होने के बावजूद, खरीदार अभी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। जानकारों का कहना है कि निवेशकों की नजर अब इस पर है कि क्या रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर होता है, क्योंकि कमजोर रुपया सोने के आयात (import) को महंगा बना देता है, जो घरेलू कीमतों को एक सहारा दे सकता है। फिलहाल, जब तक वैश्विक बाजार में बॉन्ड यील्ड और डॉलर की स्थिति स्थिर नहीं होती, सोने में उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी आशंका है।
