Gold ETF: निवेशकों की चांदी! सितंबर में ₹4,450 करोड़ से ज्यादा का निवेश, 7 महीने की ऊंचाई पर पहुंचा आंकड़ा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold ETF: निवेशकों की चांदी! सितंबर में ₹4,450 करोड़ से ज्यादा का निवेश, 7 महीने की ऊंचाई पर पहुंचा आंकड़ा

सितंबर 2026 में भारतीय गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में **₹4,450.61 करोड़** का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है, जो पिछले सात महीनों में सबसे ज्यादा है। घरेलू सोने की कीमतों में **5%** की गिरावट के बावजूद निवेशकों ने इसे सुरक्षित निवेश मानते हुए भारी खरीदारी की है।

भारतीय निवेशकों ने मौजूदा बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए गोल्ड ETFs को एक बेहतरीन ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के डेटा के मुताबिक, अगस्त में यह इनफ्लो ₹2,596.7 करोड़ था, जो सितंबर में बढ़कर ₹4,450.61 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया।

क्यों खरीदारी में जुटे हैं निवेशक?

दिलचस्प बात यह है कि सितंबर महीने में घरेलू सोने की कीमतों में करीब 5% का करेक्शन (गिरावट) देखा गया। हालांकि, इस गिरावट ने निवेशकों को डरने के बजाय खरीदारी का मौका दिया है। निवेशक अब सोने को इक्विटी बाजार के रिस्क से बचने के लिए एक 'बफर' की तरह देख रहे हैं। नतीजतन, सितंबर के अंत तक भारतीय ETFs में कुल गोल्ड होल्डिंग बढ़कर 124.4 टन हो गई है, जो दिसंबर 2025 के मुकाबले 31% अधिक है।

साल-दर-साल रिकॉर्ड तोड़ परफॉरमेंस

साल 2026 की पहली तीन तिमाहियां गोल्ड ETFs के लिए शानदार रही हैं। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कुल इनफ्लो करीब ₹45,925 करोड़ रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह आंकड़ा पूरे साल 2025 में हुए ₹42,961 करोड़ के निवेश को भी पार कर चुका है। वैश्विक स्तर पर भी यह ट्रेंड दिख रहा है, जहां सितंबर में गोल्ड ETFs में $10 बिलियन का निवेश हुआ है।

इन जोखिमों को न करें नजरअंदाज

सोने में निवेश सुरक्षित जरूर है, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। गोल्ड ETFs एक 'नॉन-यील्डिंग' एसेट है, यानी यहां आपको डिविडेंड या ब्याज के रूप में कोई रेगुलर कमाई नहीं होती। इसके अलावा, सोने की कीमतें डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स पर काफी निर्भर करती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरें बढ़ती हैं या डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की चमक फीकी पड़ सकती है। निवेशकों को सलाह है कि केवल सेफ-हेवन के भरोसे रहने के बजाय ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतों पर भी नजर बनाए रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.