गोल्ड ईटीएफ में बंपर निवेश! ₹6,300 करोड़ आया पैसा, फिजिकल गोल्ड की मांग घटी

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AuthorAditya Rao|Published at:
गोल्ड ईटीएफ में बंपर निवेश! ₹6,300 करोड़ आया पैसा, फिजिकल गोल्ड की मांग घटी

भारतीय निवेशकों ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में **₹6,300 करोड़** का निवेश किया है, जो पिछले साल की तुलना में दोगुना से भी ज्यादा है। ऊंची कीमतों और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने की यह चाहत साफ दिख रही है। फिजिकल ज्वैलरी की मांग **15%** गिरी है, वहीं ईटीएफ में निवेश का बढ़ना बताता है कि निवेशक अब डिजिटल गोल्ड की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।

सोने में 'पेपर' निवेश क्यों बढ़ा?

इस तिमाही में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में निवेश ₹6,300 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹2,670 करोड़ की तुलना में 136% ज्यादा है। यह आंकड़ा बताता है कि निवेशक अब फिजिकल गोल्ड की जगह रेगुलेटेड निवेश साधनों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनी हुई हैं। जहां एक तरफ ऊंची कीमतों ने लोगों को फिजिकल ज्वैलरी खरीदने से रोका है, वहीं दूसरी तरफ इसने सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर और मजबूत किया है। फिजिकल गोल्ड की तुलना में, ईटीएफ के जरिए निवेशक स्टॉक एक्सचेंज पर कम लागत में सोने की कीमतों का फायदा उठा सकते हैं।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय गोल्ड ईटीएफ में इस तिमाही में 4.2 टन का नेट इनफ्लो हुआ, जो पिछले साल 2.8 टन था। यह ग्लोबल ट्रेंड के विपरीत है, जहां कई देशों में गोल्ड ईटीएफ से पैसा निकल रहा है। डिजिटल म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म की सुविधा ने रिटेल निवेशकों के लिए सोने में छोटी-छोटी राशि का निवेश करना आसान बना दिया है।

फिजिकल गोल्ड की मांग पर असर

जहां ईटीएफ और बार्स के जरिए निवेश बढ़ा है, वहीं फिजिकल गोल्ड मार्केट में गिरावट देखी गई है। जून तिमाही में भारत की कुल गोल्ड डिमांड 6% घटकर 131.4 टन रह गई। इसमें सबसे ज्यादा असर ज्वैलरी डिमांड पर पड़ा, जो 15% गिरकर 75.1 टन पर आ गई। इससे पता चलता है कि सोने की ऊंची कीमतों ने मार्केट को बांट दिया है; कंज्यूमर ज्वैलरी पर खर्च कम कर रहे हैं, लेकिन वे अभी भी महंगाई और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए सोने को एक निवेश मानते हैं।

आगे क्या?

भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स को लेकर अनिश्चितता सेफ-हेवन एसेट्स की मांग को बढ़ा रही है। निवेशकों के लिए, यह फाइनेंशियल एसेट्स की ओर बढ़ता रुझान एक अहम ट्रेंड है। आगे की मांग फेस्टिव और वेडिंग सीजन में कीमतों के प्रति लोगों की संवेदनशीलता पर निर्भर करेगी। हालांकि, फिजिकल खरीदारी में ऊंची कीमतों के कारण कमी आई है, लेकिन ईटीएफ में लगातार बढ़ रहा निवेश यह दर्शाता है कि भारतीय अब सोने को एक फाइनेंशियल नजरिए से देख रहे हैं, जिसमें वे फिजिकल पजेशन के बजाय आसानी से निवेश और लिक्विडिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.