Gold Price: सोने की मांग में 70% की भारी गिरावट! इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से ग्राहकों ने बेचे पुराने गहने

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold Price: सोने की मांग में 70% की भारी गिरावट! इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से ग्राहकों ने बेचे पुराने गहने

भारत में सोने की मांग में भारी गिरावट आई है। इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी बढ़ोतरी के बाद यह मांग 70% से अधिक गिर गई है। वहीं, सोने की कीमतों में आई नरमी के चलते ग्राहक पुराने गहने बेचकर नकदी जुटा रहे हैं।

क्या हुआ है?

भारत में सोने की मांग में भारी गिरावट देखी जा रही है। 13 मई को सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% करने के बाद, मई के मध्य से मांग में 70% से अधिक की कमी आई है। इसके साथ ही, बाजार में यह भी देखा जा रहा है कि ग्राहक अपने पुराने सोने के गहने बेच रहे हैं। इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुमानों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में पुराने सोने के गहनों की बिक्री 50 टन तक पहुंच सकती है, जो पिछले अवधियों की तुलना में काफी ज्यादा है।

कीमतों में नरमी और बाजार का मूड

सोने की कीमतों में जनवरी 2026 की शुरुआत से लगभग 30% की बड़ी गिरावट आई है। जनवरी में ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के शिखर से कीमतें घटकर जून के अंत तक लगभग ₹1,40,000 पर आ गई हैं। कीमतों में आई यह नरमी, इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी के कारण सोने के आयात की बढ़ी हुई लागत के साथ मिलकर, खरीदारों के बीच सावधानी बरतने का कारण बनी है। वैश्विक कारक भी इसमें भूमिका निभा रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें $4,000 से नीचे आ गई हैं। बाजार रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदें और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव धातु पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारक हैं।

ज्वेलरी सेक्टर पर असर

भारतीय ज्वेलरी रिटेल सेक्टर में निवेशकों के लिए यह ट्रेंड एक चुनौती पेश करता है। Titan Company और Kalyan Jewellers जैसी कंपनियां वॉल्यूम ग्रोथ बढ़ाने के लिए ग्राहकों की मांग पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं। जब मांग में 70% की गिरावट आती है, तो खुदरा विक्रेताओं को अधिक स्थिर अवधियों में देखे गए बिक्री की मात्रा में उसी स्तर की वृद्धि बनाए रखने में अक्सर कठिनाई होती है। हालांकि ज्वैलर्स प्रोसेसिंग चार्ज और हाई-वैल्यू बिक्री से कमाते हैं, लेकिन नए गहनों की खरीद में लगातार मंदी टॉप-लाइन ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है। इसके अतिरिक्त, यदि पुराने गहने बेचने का चलन जारी रहता है, तो खुदरा विक्रेताओं को इन्वेंट्री में वृद्धि देखने को मिल सकती है, लेकिन नए गहनों की बिक्री पर मार्जिन कम हो सकता है।

ग्राहक क्यों बेच रहे हैं?

ऐतिहासिक डेटा बताता है कि जब सोने की कीमतों में लंबी गिरावट का दौर आता है, तो उपभोक्ता अक्सर नई संपत्ति खरीदने के बजाय अपने मौजूदा होल्डिंग्स को बेचने का विकल्प चुनते हैं। यह व्यवहार कीमतों में और गिरावट के डर से प्रेरित होता है। जैसे-जैसे सोने का मूल्य अपने उच्चतम स्तर से गिरा है, कई परिवार मूल्य को लॉक करने या नकदी जुटाने के लिए पुराने गहने बेच रहे हैं। इससे एक फीडबैक लूप बन रहा है, जहां सेकेंडरी मार्केट में सप्लाई बढ़ती है जबकि नई रिटेल खरीदारी कमजोर बनी हुई है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

ज्वेलरी सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को तीन प्रमुख क्षेत्रों में अपडेट देखना चाहिए। पहला, सोने के इंपोर्ट ड्यूटी में किसी भी सरकारी घोषणा पर नजर रखें, क्योंकि नीतिगत बदलाव सीधे खुदरा विक्रेताओं के लिए कच्चे माल की लागत को प्रभावित करते हैं। दूसरा, प्रमुख ज्वेलरी श्रृंखलाओं द्वारा रिपोर्ट की गई तिमाही वॉल्यूम ग्रोथ की निगरानी करें ताकि यह आकलन किया जा सके कि क्या वे व्यापक मांग में मंदी के बावजूद ग्राहकों को बनाए रखने में सक्षम हैं। अंत में, सोने की कीमतों के ट्रेंड पर नजर रखें, क्योंकि कीमतों में स्थिरीकरण या रिकवरी अक्सर उपभोक्ता विश्वास की वापसी और खरीदारी में नई रुचि का संकेत देती है।

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