US मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों के बाद भारतीय ज्वेलर्स ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते की मांग तेज कर दी है। सूरत का डायमंड उद्योग संकट में है, जहां एक्सपोर्ट में **44%** की गिरावट दर्ज की गई है और रेवेन्यू स्थिर बना हुआ है।
ट्रेड डील की दरकार
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण को देखते हुए भारतीय जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर ने फिर से द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की वकालत शुरू कर दी है। कारोबारियों का मानना है कि इस राजनीतिक बदलाव से उन व्यापारिक बाधाओं पर चर्चा तेज हो सकती है, जो फिलहाल भारतीय कट और पॉलिश हीरों पर भारी टैरिफ (Tariffs) के रूप में लागू हैं।
सूरत के डायमंड हब पर दबाव
भारत के डायमंड मैन्युफैक्चरिंग हब 'सूरत' पर इस समय गहरा संकट है। फैक्ट्री बंद होने और छंटनी जैसी खबरें आम हो गई हैं। अप्रैल-दिसंबर 2025 की अवधि में अमेरिका को होने वाले जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्ट में साल-दर-साल 44% की भारी गिरावट देखी गई है। यह डेटा वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के प्रति इस उद्योग की कमजोरी को दर्शाता है।
फाइनेंशियल आउटलुक और रिस्क
नेचुरल डायमंड्स के लिए चालू फाइनेंशियल ईयर का रेवेन्यू फ्लैट रहने का अनुमान है। एनालिस्ट्स का कहना है कि टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता, लागत में बढ़ोतरी और वैश्विक मांग में कमी इसके मुख्य कारण हैं। मौजूदा समय में कंपनियां अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी से ज्यादा बाहरी पॉलिसी फैक्टर्स के दबाव में हैं, जिससे प्रॉफिट मार्जिन सीमित हो गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों के लिए एक औपचारिक ट्रेड डील का होना सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर है। जब तक कोई स्थिर फ्रेमवर्क नहीं बनता, तब तक अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहने वाली कंपनियों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। भविष्य में वाशिंगटन से आने वाली ट्रेड पॉलिसी से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और एक्सपोर्ट वॉल्यूम के ट्रेंड पर नजर रखना बहुत जरूरी होगा, क्योंकि इसी से रिकवरी की गति का पता चलेगा।
