डॉलर के आगे भू-राजनीतिक तनाव का फीका असर
बुधवार, 3 मार्च 2026 को भारत में कीमती धातुओं के ईटीएफ (ETFs) पर भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। कुछ ही दिन पहले आई तेजी अब पूरी तरह से खत्म हो गई। HDFC Silver ETF जैसे प्रमुख सिल्वर ईटीएफ 8.5% तक गिर गए, जबकि UTI, Groww, Tata, Axis और ICICI Prudential Silver ETFs में 7% से अधिक की गिरावट आई। गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) भी दबाव में थे, Axis Mutual Fund Gold ETF, Union Gold ETF और The Wealth Company Gold ETF जैसे फंड 4% से अधिक गिरे।
यह व्यापक गिरावट अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) के मजबूत होने के कारण हुई, जो 3 मार्च को 3.25 महीने के उच्चतम स्तर 99.07 पर पहुंच गया था। डॉलर के मजबूत होने से डॉलर-डिनॉमिनेटेड (Dollar-denominated) कमोडिटीज़ जैसे सोना और चांदी विदेशी खरीदारों के लिए महंगी हो गईं, जिससे कीमतों पर नीचे की ओर दबाव पड़ा।
ईटीएफ की कमजोरी के विपरीत MCX फ्यूचर्स में मजबूती
ईटीएफ के प्रदर्शन के बिल्कुल विपरीत, भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स ने मजबूती दिखाई। अप्रैल डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स 1.53% बढ़कर ₹1,63,581 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए, जबकि मई डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स 3.08% चढ़कर ₹2,73,500 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे थे। यह अंतर दर्शाता है कि जहाँ स्पॉट (Spot) और ईटीएफ बाजार करेंसी की चाल से प्रभावित थे, वहीं फ्यूचर्स बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कुछ सट्टागत तेजी बनी हुई थी।
भू-राजनीतिक गरमाहट और मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर
शुरुआती सेफ- हैवेल मांग का मुख्य कारण ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल की बढ़ती हवाई जंग थी, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की कथित मौत की खबर थी। इस बढ़ी हुई भू-राजनीतिक जोखिम ने आमतौर पर सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दिया है। हालांकि, स्पॉट मार्केट पर इसका तत्काल असर जटिल रहा। अंतर्राष्ट्रीय स्पॉट सिल्वर की कीमतें भू-राजनीतिक डर के कारण $96 प्रति औंस के स्तर तक पहुंचने के बाद, डॉलर की मजबूती और प्रॉफिट-टेकिंग (Profit-taking) के कारण 3 मार्च की शुरुआत में $84.88 के आसपास आ गईं। स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) ने भी $5,400 प्रति औंस से गिरकर $5,018 के करीब आ गया, जो मजबूत डॉलर और तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों से प्रभावित था। कच्चे तेल की कीमतों में भी Brent क्रूड 1.49% और WTI क्रूड 1.09% की वृद्धि देखी गई।
विश्लेषकों का नज़रिया: सोने पर तेजी, चांदी में उतार-चढ़ाव
ईटीएफ की अल्पकालिक कमजोरी के बावजूद, सोने का व्यापक आउटलुक (Outlook) सकारात्मक बना हुआ है। विश्लेषक लगातार भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत फंडामेंटल्स का हवाला दे रहे हैं, जिससे सोने की रिकवरी का अनुमान है। कई संस्थाएं 2026 में सोने की कीमतों को नए रिकॉर्ड बनाते देख रही हैं। JPMorgan ने साल के अंत तक $6,300 प्रति औंस तक का लक्ष्य रखा है, जबकि Macquarie ने 2026 के औसत पूर्वानुमान को $4,323 किया है।
चांदी के लिए, हालांकि, अधिक अस्थिरता (Volatility) की उम्मीद है। लंबी अवधि के लिए तेजी का फ्रेमवर्क भू-राजनीतिक कारकों के कारण बना हुआ है, लेकिन सट्टागत लेनदेन की उम्मीद है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। विश्लेषक 2026 में चांदी के $135 तक पहुंचने की भविष्यवाणी कर रहे हैं, हालांकि इसकी उच्च अस्थिरता के कारण इसमें तेज गिरावट की भी संभावना है। पिछले एक साल में, सिल्वर ईटीएफ ने 175.38% का शानदार रिटर्न दिया, जो गोल्ड ईटीएफ के 83.39% से काफी अधिक है।
मुख्य जोखिम: डॉलर की मजबूती और बाजार की अनिश्चितता
वर्तमान में सबसे बड़ा जोखिम अमेरिकी डॉलर की निरंतर मजबूती है, जो डॉलर-डिनॉमिनेटेड कीमती धातुओं के लिए सीधा सिरदर्द है। DXY इंडेक्स पर 99 से ऊपर डॉलर का चढ़ना सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव का संकेत देता है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष महत्वपूर्ण अनिश्चितता पैदा करता है, जिससे तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जो वैश्विक विकास की उम्मीदों को कम कर सकती है। ऐसे माहौल में, सोना और चांदी जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों को रखने की अवसर लागत (Opportunity cost) बढ़ जाती है।
