Cotton Prices: कपास की कीमतों में उबाल, भाव **₹68,000** के पार; क्या टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ेगा दबाव?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Cotton Prices: कपास की कीमतों में उबाल, भाव **₹68,000** के पार; क्या टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ेगा दबाव?

कम बारिश के कारण हुई कम पैदावार से Cotton की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। भाव **₹68,000** प्रति कैंडी तक पहुंच गए हैं। किसान माल रोक रहे हैं, जिससे स्पिनिंग मिलों के सामने इन्वेंट्री का संकट खड़ा हो गया है और मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

भारत में कपास की कीमतें तेजी से बढ़कर ₹68,000 प्रति कैंडी के स्तर पर पहुंच गई हैं। यह उछाल 2026-27 हार्वेस्ट सीजन की शुरुआत के साथ ही बाजार में आई जबरदस्त सप्लाई की कमी के कारण देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्पिनिंग मिलों की ओर से बढ़ती मांग और मंडियों में सीमित आवक ने कीमतों को हवा दे दी है।

सप्लाई का संकट और किसानों का रुख

महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून की कमी का सीधा असर फसल पर पड़ा है। अनुमान है कि इस साल कुल कपास उत्पादन में 10% की गिरावट आ सकती है। किसान भी अभी अपनी उपज को बेचने के बजाय ₹8,650 के मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) से ऊपर बेहतर भाव मिलने की उम्मीद में स्टॉक रोक कर बैठे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई और टाइट हो गई है।

स्पिनिंग मिलों पर मार्जिन का दबाव

महंगी कीमतों पर कच्चा माल खरीदने के कारण स्पिनिंग इंडस्ट्री के लिए प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है। Cotton Corporation of India ने भी 9 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह के लिए अपने ऑक्शन प्राइसेस में ₹300 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की है, जो इनपुट कॉस्ट में बढ़ते दबाव का संकेत है।

निवेशकों के लिए अहम वॉचलिस्ट

निवेशकों को अब 31 अक्टूबर, 2026 की डेडलाइन पर नजर रखनी चाहिए, जब कॉटन इंपोर्ट पर मिलने वाली ड्यूटी-फ्री सुविधा समाप्त हो रही है। यदि सरकार इस विंडो को आगे नहीं बढ़ाती है, तो स्पिनिंग मिलों के लिए रॉ मटेरियल की लागत काफी बढ़ जाएगी, क्योंकि इंटरनेशनल मार्केट से कपास मंगाना महंगा हो जाएगा। टेक्सटाइल सेक्टर में मार्जिन बचाने के लिए अब सरकार के अगले फैसलों और फसल की आवक के ताजा डेटा पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.