Vedanta और Hindalco समेत देश की बड़ी कॉपर कंपनियों ने सरकार से सोलर कंपोनेंट्स पर इंपोर्ट टैक्स बढ़ाने की अपील की है। सेक्टर का तर्क है कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बचाने और **₹30,000 करोड़** के निवेश को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
ड्यूटी बढ़ाने की मांग के पीछे का गणित
Indian Primary Copper Producers Association ने आगामी बजट से पहले सरकार के सामने अपनी बात रखी है। कंपनियों ने सोलर PV रिबन और बसबार पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को मौजूदा 5% से बढ़ाकर 10% करने का प्रस्ताव दिया है।
क्यों दबाव में है घरेलू इंडस्ट्री?
डेटा बताते हैं कि भारत में सोलर-स्पेसिफिक कॉपर कंपोनेंट्स की सालाना प्रोडक्शन क्षमता 30,000 टन है, जबकि डिमांड 25,000 से 28,000 टन के बीच है। बावजूद इसके, चीनी आयात के चलते स्थानीय कंपनियां अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। इसके अलावा, रिफाइंड कॉपर का आयात भी 77% बढ़कर 4.95 लाख टन (2025 तक) पहुंच गया है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
कॉपर सेक्टर ने अब तक ₹30,000 करोड़ का निवेश किया है और 2030 तक ₹35,000 करोड़ के और विस्तार की योजना है। हालांकि, निवेशकों को यह समझना होगा कि यह सेक्टर कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर है और इसकी प्रॉफिट मार्जिन ग्लोबल कमोडिटी कीमतों के उतार-चढ़ाव पर टिकी रहती है। वर्किंग कैपिटल की जरूरत और GST का बोझ भी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब देखना होगा कि सरकार बजट में इन कंपनियों की चिंताओं पर क्या रुख अपनाती है।
