भारत का कॉफी एक्सपोर्ट फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में **25%** बढ़कर **2.42 लाख टन** के स्तर पर पहुंच गया है। ग्लोबल प्राइस में उतार-चढ़ाव के बीच एक्सपोर्ट कमाई **10%** बढ़कर **$1.17 बिलियन** रही है, हालांकि ऊंचे वैल्युएशन को लेकर निवेशक सतर्क हैं।
भारतीय कॉफी एक्सपोर्टर्स के लिए वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही काफी शानदार रही है। कॉफी का कुल एक्सपोर्ट वॉल्यूम साल-दर-साल 25% बढ़कर 2.42 लाख टन हो गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 1.93 लाख टन था। हालांकि, डॉलर के टर्म में कमाई में सिर्फ 10% की बढ़ोतरी दिखी है और यह $1.17 बिलियन तक ही पहुंच पाई है। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में कीमतों का अस्थिर होना है, जिसने एक्सपोर्टर्स के मुनाफा मार्जिन पर दबाव डाला है।
इंस्टेंट कॉफी की बढ़ती डिमांड
इस ग्रोथ के पीछे 'इंस्टेंट कॉफी' का सबसे बड़ा हाथ है। इंस्टेंट कॉफी का एक्सपोर्ट 25.5% उछलकर 1.34 लाख टन पर पहुंच गया है। वैल्यू-एडेड कॉफी प्रोडक्ट्स की ग्लोबल मार्केट में लगातार बढ़ती मांग का फायदा भारत को मिल रहा है। इटली, जर्मनी, रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारत की कॉफी के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं।
CCL Products और निवेशकों के लिए संकेत
इस सेक्टर में लिस्टेड कंपनी CCL Products India Ltd का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है। कंपनी ने जून 2026 की तिमाही में 61.33% का शानदार नेट प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज किया है। 1 अक्टूबर 2026 तक कंपनी का शेयर ₹1,046.40 पर ट्रेड कर रहा था और मार्केट कैप लगभग ₹13,974 करोड़ है।
हालांकि, सावधानी भी जरूरी है। कंपनी का शेयर फिलहाल 6 गुना बुक वैल्यू पर ट्रेड कर रहा है, जो यह बताता है कि भविष्य की ग्रोथ की उम्मीदें पहले ही शेयर के दाम में शामिल हो चुकी हैं। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और करेंसी में बदलाव जैसे जोखिम कंपनी के मार्जिन पर असर डाल सकते हैं।
फसल वर्ष 2027 का आउटलुक
कॉफी बोर्ड ने फसल वर्ष 2026-27 के लिए 4.04 लाख टन का प्रोडक्शन अनुमान लगाया है, जिसमें 1.20 लाख टन अरेबिका और 2.84 लाख टन रोबस्टा शामिल है। बाजार के जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या एक्सपोर्ट कंपनियां मौजूदा रफ्तार को आगे भी बरकरार रख पाएंगी।
