Critical Minerals Policy: डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सरकार का बड़ा कदम, जल्द आएगी नई स्ट्रैटेजी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Critical Minerals Policy: डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सरकार का बड़ा कदम, जल्द आएगी नई स्ट्रैटेजी

भारत सरकार अगले एक महीने के भीतर क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के लिए एक नई नेशनल स्टॉकपाइलिंग पॉलिसी लाने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना है। साथ ही, चार राज्यों में खास प्रोसेसिंग पार्क भी बनाए जाएंगे।

भारत सरकार अब क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। माइंस मिनिस्ट्री अगले कुछ हफ्तों में एक नई नेशनल पॉलिसी पेश करने वाली है, जिसका लक्ष्य डिफेंस, टेलीकॉम, एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जरूरी सेक्टर्स को ग्लोबल सप्लाई चेन के झटकों से बचाना है। माइंस सेक्रेटरी केशव चंद्रा ने पुष्टि की है कि 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' के तहत इस पॉलिसी का ड्राफ्ट अब आखिरी स्टेज में है।

30 से ज्यादा खनिजों पर नजर

इस पॉलिसी के तहत 30 से अधिक महत्वपूर्ण खनिजों की एक लिस्ट तैयार की गई है, जिसमें लिथियम, निकल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं। भारत में बढ़ते हुए ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को देखते हुए, इन खनिजों की उपलब्धता एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गई है। सरकार का सीधा लक्ष्य विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करना है।

4 राज्यों में बनेंगे प्रोसेसिंग पार्क

सरकार गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में समर्पित मिनरल प्रोसेसिंग पार्क बनाने की योजना पर काम कर रही है। ये पार्क केवल कच्चा माल निकालने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वैल्यू एडिशन और रिफाइनिंग पर ध्यान केंद्रित करेंगे। जो कंपनियां निकल या बैटरी मेटल्स की माइनिंग और प्रोसेसिंग से जुड़ी हैं, उनके लिए यह एक स्थिर माहौल तैयार कर सकता है।

निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां

हालांकि, यह पॉलिसी डोमेस्टिक प्रोडक्शन को बढ़ावा देगी, लेकिन बाजार के जानकारों को कुछ जोखिम भी दिख रहे हैं:

  • एग्जीक्यूशन रिस्क: भारत के माइनिंग सेक्टर में पहले भी नीलामी में देरी और रेगुलेटरी अनिश्चितताएं देखी गई हैं।
  • कैपिटल एक्सपेंडिचर: प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के लिए भारी निवेश की जरूरत होगी, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव पड़ सकता है।
  • मार्केट वोलेटिलिटी: ग्लोबल लेवल पर मिनरल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।

अब सबकी नजरें पॉलिसी के फाइनल डॉक्यूमेंट पर हैं, जिसमें मिलने वाली सरकारी इंसेंटिव्स और जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition) जैसी अहम जानकारियों पर स्पष्टता मिलेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.