Sugar Sector: चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी, सरकार इथेनॉल फीडस्टॉक पर लगा सकती है रोक

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AuthorMehul Desai|Published at:
Sugar Sector: चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने की तैयारी, सरकार इथेनॉल फीडस्टॉक पर लगा सकती है रोक

देश में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार इथेनॉल प्रोडक्शन के नियमों में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है। शुगर मिल्स द्वारा गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस के इस्तेमाल पर पाबंदी लगने से बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ सकती है, लेकिन इससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ना तय है।

देश में चीनी की खुदरा कीमतें ₹70 प्रति किलो के करीब पहुंच गई हैं, जिसे देखते हुए सरकार अब फूड सिक्योरिटी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अधिकारी इथेनॉल बनाने में गन्ने के रस (Sugarcane Juice) और बी-हैवी मोलासेस (B-heavy molasses) के उपयोग को सीमित करने की योजना बना रहे हैं। इसके तहत मिल्स को सी-हैवी मोलासेस (C-heavy molasses) पर शिफ्ट होने का निर्देश दिया जा सकता है, ताकि चीनी की कुल उपलब्धता को बढ़ाया जा सके।

कंपनियों के लिए क्या है रिस्क?

यह कदम भारत के महत्वाकांक्षी 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग टारगेट के सामने बड़ी चुनौती है। शुगर मिलें लंबे समय से डिस्टिलरी से होने वाली कमाई के जरिए चीनी के उतार-चढ़ाव वाले बिजनेस को मैनेज करती रही हैं। अगर सरकार ब्लेंडिंग टारगेट को E20 से घटाकर E15 करती है या फीडस्टॉक बदलती है, तो डिस्टिलरी सेगमेंट का रेवेन्यू प्रभावित होगा। इसके अलावा, क्रशिंग सीजन को जल्द शुरू करने का ऑपरेशनल दबाव भी कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है।

क्या है इंडस्ट्री का अगला कदम?

इस बदलते माहौल में कई कंपनियां अब मक्का (Maize) जैसे अनाजों का इस्तेमाल करके इथेनॉल बनाने की क्षमता बढ़ा रही हैं। हालांकि, अनाज से बनने वाले इथेनॉल की प्रॉफिटेबिलिटी कच्चे माल की अस्थिर कीमतों पर निर्भर करती है। निवेशकों को अब सरकार की ओर से आने वाले नए नोटिफिकेशन और ब्लेंडिंग कोटे पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही आने वाले समय में शुगर कंपनियों की बैलेंस शीट और कैश फ्लो की दिशा तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.