Edible Oil: त्योहारी सीजन से पहले खाने के तेल पर बड़ी राहत की तैयारी, Import Duty में हो सकती है **5%** की कटौती

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AuthorAditya Rao|Published at:
Edible Oil: त्योहारी सीजन से पहले खाने के तेल पर बड़ी राहत की तैयारी, Import Duty में हो सकती है **5%** की कटौती

महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को सरकार बड़ी राहत देने की तैयारी में है। खाने के तेल की बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए सरकार बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में **5%** की कटौती पर विचार कर रही है।

महंगाई पर सरकार का वार

त्योहारी सीजन के दौरान खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। अगस्त 2026 में रिटेल इन्फ्लेशन के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसमें खाने के तेल की कीमतों का बड़ा योगदान है। सरकार अब इस पर लगाम लगाने के लिए बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में 5% की कटौती करने पर मंथन कर रही है।

सरकार के सामने चुनौती

यह फैसला सरकार के लिए तलवार की धार पर चलने जैसा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 2/3 हिस्सा इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना और यूक्रेन जैसे देशों से इम्पोर्ट करता है। ड्यूटी कम करने से आम जनता को तो राहत मिल सकती है, लेकिन डर इस बात का है कि कहीं सस्ते इम्पोर्ट से देश के तिलहन किसानों (Oilseed Farmers) की कमाई पर बुरा असर न पड़े।

कंपनियों पर असर

हाल ही में सरकार ने 1 सितंबर 2026 से पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल के लिए टैरिफ वैल्यू बढ़ाई थी, लेकिन अब रणनीति में यह बदलाव महत्वपूर्ण है। Adani Wilmar और Patanjali Foods जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए यह बदलाव कच्चे माल की लागत (Raw Material Cost) पर सीधा असर डालेगा।

रिस्क फैक्टर

इतिहास गवाह है कि जब भी भारत इंपोर्ट ड्यूटी घटाता है, तो ग्लोबल मार्केट में पाम और सोया तेल के दाम बढ़ जाते हैं। एक्सपोर्ट करने वाले देश मांग बढ़ने का फायदा उठाते हुए अपने दाम बढ़ा देते हैं, जिसका असर अंततः भारतीय ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं ताकि साफ हो सके कि आम आदमी को वाकई राहत मिलेगी या यह केवल ग्लोबल कीमतों में उछाल का कारण बनेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.