India Vegetable Oil Imports: जून में **29%** की भारी गिरावट, पाम ऑयल की घटती छूट बनी वजह

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Vegetable Oil Imports: जून में **29%** की भारी गिरावट, पाम ऑयल की घटती छूट बनी वजह

भारत में जून महीने के दौरान वनस्पति तेल (Vegetable Oil) का आयात पिछले साल के मुकाबले **29%** घटकर **11.46 लाख टन** रहा। यह इस ऑयल ईयर का सबसे निचला स्तर है। पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल जैसे दूसरे तेलों के बीच कीमत का अंतर कम होने से आयात पर असर पड़ा है।

पाम ऑयल पर कीमत के अंतर का असर

आयात में आई इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण पाम ऑयल की कीमत में मिल रही छूट का कम होना है। भारत पाम ऑयल को उसकी कम कीमत के चलते बड़े पैमाने पर आयात करता है। लेकिन, जब पाम ऑयल और सोयाबीन ऑयल जैसे अन्य तेलों के बीच कीमत का अंतर $50 प्रति टन से कम हो गया, तो आयातकों के लिए यह सौदा उतना फायदेमंद नहीं रह गया।

इसके चलते, जून में क्रूड पाम ऑयल का आयात 4,88,863 टन रहा, जो मई के 5,46,456 टन से कम है। यह दिखाता है कि घरेलू कंपनियां अब आयात के फैसले में कीमतों के अंतर को ज्यादा महत्व दे रही हैं।

आयात मिश्रण और स्टॉक की स्थिति

पाम ऑयल की मात्रा में कमी आई, वहीं अन्य कमोडिटी के आयात में मिला-जुला रुख रहा। सोयाबीन ऑयल का आयात भी पिछले महीने के मुकाबले 23% घटकर 3,81,000 टन रहा। हालांकि, सनफ्लावर ऑयल का आयात बढ़ा है, जो जून में 2,42,870 टन तक पहुंच गया, जबकि मई में यह 1,95,726 टन था।

यह भी गौर करने वाली बात है कि लगातार दूसरे महीने रिफाइंड कुकिंग ऑयल का आयात शून्य रहा है। 1 जुलाई, 2026 तक, देश में वनस्पति तेल का कुल स्टॉक 20.09 लाख टन था, जो पिछले साल के 22.16 लाख टन से कम है। यह दर्शाता है कि इंडस्ट्री अब कम इन्वेंट्री के साथ काम कर रही है।

साल-दर-साल वृद्धि और क्षेत्रीय व्यापार

जून की गिरावट के बावजूद, चालू ऑयल ईयर के लिए कुल आयात अभी भी पिछले साल से ज्यादा है। नवंबर 2025 से जून 2026 तक के आठ महीनों में कुल 105.7 लाख टन का आयात हुआ है, जो पिछले चक्र की इसी अवधि के 99.55 लाख टन से अधिक है।

निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि नेपाल से रिफाइंड ऑयल का निर्यात भारतीय बाजार में भूमिका निभा रहा है। SAFTA समझौते के तहत, नेपाल ने नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत को 3.3 लाख टन से अधिक रिफाइंड तेल का निर्यात किया है। इन आयातों की गति, घरेलू मांग और वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव, आने वाली तिमाहियों में एडिबल ऑयल कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.