India-UK Trade Deal: स्टील एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी खबर, जानें क्या होगा असर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India-UK Trade Deal: स्टील एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ी खबर, जानें क्या होगा असर

भारत और यूके के बीच हुए नए ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय स्टील एक्सपोर्टर्स को **7-10%** का टैरिफ फायदा मिलेगा। हालांकि, **2027** में लागू होने वाले यूके के कार्बन टैक्स को लेकर निवेशकों को सतर्क रहने की ज़रूरत है।

क्या हुआ?

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) फाइनल हो गया है। इस डील के तहत भारतीय स्टील एक्सपोर्टर्स को खास टैरिफ फायदा दिया जाएगा। इस एग्रीमेंट से भारतीय स्टील UK मार्केट में और ज़्यादा कॉम्पिटिटिव बनेगा, क्योंकि उन्हें 7-10% तक का टैरिफ बेनिफिट मिलेगा। यह डील भारत के मौजूदा स्टील एक्सपोर्ट का लगभग 85% हिस्सा सेफगार्ड ड्यूटी से बचाएगी और बाकी के लिए खास कोटा भी तय करेगी।

निवेशकों के लिए क्यों ज़रूरी है?

हालांकि टैरिफ में यह कमी एक अच्छी खबर है, लेकिन इसके बड़े अवसर को सही परिप्रेक्ष्य में देखना ज़रूरी है। फिलहाल, भारत का कुल स्टील प्रोडक्शन के मुकाबले UK को होने वाला एक्सपोर्ट काफी कम है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में जहां कुल प्रोडक्शन 161 मिलियन टन से ज़्यादा था, वहीं UK एक्सपोर्ट्स बहुत कम थे। इस डील का मुख्य फायदा बड़े रेवेन्यू में तुरंत बढ़ोतरी के बजाय मार्केट में स्थिरता लाना है। इससे भारतीय स्टील निर्माताओं को UK में अपनी सप्लाई चेन और प्लानिंग के लिए ज़्यादा विज़िबिलिटी और भरोसा मिलेगा।

2027 के कार्बन टैक्स की चुनौती

निवेशकों के लिए सबसे अहम बात UK का आने वाला कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) है, जो 2027 में शुरू होने वाला है। यह असल में इम्पोर्ट पर लगने वाला एक कार्बन टैक्स है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने एक बड़ा रिस्क बताया है: नए ट्रेड डील से मिला फायदा इस कार्बन कॉस्ट की वजह से खत्म हो सकता है। अगर भारतीय स्टील प्रोड्यूसर्स अपने कार्बन फुटप्रिंट को जल्दी कम नहीं कर पाते हैं, तो UK में एक्सपोर्ट की लागत बढ़ सकती है, और टैरिफ की यह बचत बेकार जा सकती है।

बिज़नेस स्ट्रैटेजी और कैपिटल स्पेंडिंग

यह एग्रीमेंट कंपनियों को क्लीनर प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है। Shyam Metalics and Energy जैसी कंपनियों के मैनेजमेंट ने भी कहा है कि इस ट्रेड पैक्ट से उन्हें डीकार्बोनाइजेशन के लिए बड़े कैपिटल स्पेंडिंग को जस्टिफाई करने में मदद मिलेगी। ग्रीन स्टील की ओर बढ़ना अब सिर्फ एक एनवायर्नमेंटल गोल नहीं रहा, बल्कि UK जैसे डेवलप्ड मार्केट में भारी कार्बन पेनल्टी के बिना एक्सेस बनाए रखने के लिए एक कॉम्पिटिटिव ज़रूरत बन गया है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

इस ट्रेड डील का असली असर सिर्फ टैरिफ कम होने से नहीं, बल्कि इसके एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगा। आने वाले क्वार्टर्स में निवेशकों को कुछ खास बातों पर नज़र रखनी चाहिए। पहला, ग्रीन स्टील टेक्नोलॉजी में कंपनियों के निवेश पर अपडेट देखें, क्योंकि यही तय करेगा कि वे 2027 के कार्बन टैक्स को कैसे झेल पाएंगे। दूसरा, एक्सपोर्ट वॉल्यूम की रिपोर्ट्स पर ध्यान दें कि क्या कोटा-आधारित एक्सेस से UK में मार्केट शेयर वास्तव में बढ़ रहा है। आखिर में, कार्बन अकाउंटिंग फ्रेमवर्क के रिगार्डिंग किसी भी नए रेगुलेटरी गाइडेंस पर नज़र रखें, क्योंकि ये नियम 2027 में कार्बन टैक्स लागू होने के बाद बिजनेस की असल लागत तय करेंगे।

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