इंपोर्ट में आई तूफानी तेजी
यह इंपोर्ट इतना बढ़ा है कि UAE अब भारत के कुल गोल्ड इंपोर्ट का 28% हिस्सा हो गया है। GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने बताया कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू होने से पहले UAE का हिस्सा भारत के गोल्ड इंपोर्ट में सिर्फ 7.9% था, जो 2025 तक बढ़कर 28% पर पहुंच गया। इंपोर्ट का यह मूल्य 2.9 अरब डॉलर से बढ़कर 16.5 अरब डॉलर हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देश में मितव्ययिता (Austerity) बरतने की अपील ने इस मामले की तात्कालिकता को और बढ़ा दिया है।
आखिर इतनी तेजी क्यों?
भारत-UAE FTA के तहत, UAE से आने वाले सोने पर एक खास 'टैरिफ रेट कोटा' (TRQ) लागू होता है। शुरुआत में यह कोटा 120 टन सालाना था, जो 2027 तक 200 टन तक बढ़ने वाला है। इस TRQ के तहत UAE से सोना 1% कम टैरिफ पर इंपोर्ट किया जा सकता है। इसके अलावा, 2024 के बजट में भारत सरकार ने सोने पर सामान्य इंपोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया है। ऐसे में, UAE के TRQ के ज़रिए आने वाले सोने पर प्रभावी ड्यूटी सिर्फ 5% रह जाती है।
री-रूटिंग का खतरा और समाधान
GTRI की सबसे बड़ी चिंता यह है कि UAE खुद सोना नहीं निकालता या प्रोसेस नहीं करता। ऐसे में यह आशंका है कि तीसरे देशों का सोना UAE के रास्ते भारत में लाकर सस्ता टैरिफ का फायदा उठाया जा रहा हो। GTRI का मानना है कि इस तरह की 'री-रूटिंग' FTA के मकसद को कमजोर कर सकती है और भारत के व्यापार संतुलन (Trade Balance) को नुकसान पहुंचा सकती है।
GTRI ने इस समस्या के समाधान के लिए सख्त 'उत्पत्ति के नियम' (Rules of Origin) लागू करने और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में कीमती धातुओं पर मिली छूटों का दोबारा मूल्यांकन करने की सलाह दी है। साथ ही, यह भी बताया गया है कि प्राइवेट कंपनियां और ज्वैलर्स अब गिफ्ट सिटी (GIFT City) के ज़रिए सीधे बुलियन (सोना) इंपोर्ट कर सकते हैं, जिससे व्यापार प्रवाह (Trade Flows) में एक और जटिलता जुड़ गई है।
